
अपनी आने वाली सीरीज के बारे में वे कहते हैं, ‘मेरी आने वाली सीरीज को साहिल सांघा डायरेक्ट कर रहे हैं। इस शो की शूटिंग पूरी तरह से रुक चुकी है लेकिन इस शो के बारे में मैं ज्यादा नहीं बता सकता, जब तक ये तय नहीं हो जाता कि ये कौन-से प्लेटफॉर्म पर काम करेगा। मगर इतना जरूर बता सकता हूं कि मेरा रोल दिलचस्प है। विजिटर मी एक नए अवतार में देखें।’
मैं अपने दर्शकों को अच्छे चरित्रों में ही देखना चाहता हूं
कम फिल्में करने के मुद्दे पर कहते हैं, ‘मुझसे ये सवाल करते हैं, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैंने फिल्मों से ब्रेक लिया है, क्योंकि मैं लगातार काम कर रहा हूं। मैं शो, इवेंट और कई आकाशगंगाओं में फिल्में कर रहा हूं, फिर चाहे वो पंजाबी हो, बंगाली हो, तमिल हो, कन्नड़ हो, कन्नड़ हो या फिर राजस्थानी हो। राजस्थानी फिल्म तावड़ो द सनलाइट, जिसके लिए मुझे राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का दावा भी मिला था। मेरे काफी शो और कार्यक्रम चल रहे हैं और मेरी कंपनी स्पेन इंटरटेनमेंट जो फिल्में और विज्ञापन प्रोड्यूस करती है। डिजिटल वेबसाइट भी है। तो इन सभी चीजों से मैं लगातार कनेक्टेड हूं। मैं एक जुड़ा हुआ हूं और इंडस्ट्री से ही जुड़ा हूं, तो मुझे ऐसा कभी नहीं लगा कि मैं दूर हूं इंडस्ट्री से। इसकी एक वजह यह भी है कि मैं नहीं चाहता था कि ऑडिएंस मुझे एक ऐसे रोल में देखे, जिससे वो हासिल ना हों। मुझे लगता है कि किसी भी रचना को करके कलाकार की संतोषी होना जरूरी है।
आगामी ‘महापौर’ में गंभीर चरित्र हैं
अपनी आने वाली फिल्म ‘महापौर’ के बारे में वे कहते हैं, ‘इस समय मैं लखनऊ में महापौर की शूटिंग कर रहा हूं। महापौर मेरे लिए एक बहुत ही अलग ब्रेकअप की कहानी होगी, बहुत ही अलग ब्रेकअप का चरित्र होगा जो ना मैंने कभी अपने लिए सोचा था और ना ऑडियंस ने मुझे ऐसी स्टेटमेंट में देखा होगा। महापौर में मैं लखनऊ के मेयर के तौर पर नजर आऊंगा। जब फिल्म शुरू होती है, तो लोग देखते हैं कि वो एक नो नॉन सेंस और है। लोग इससे सहमत हैं। इस मुकाम तक वो कैसे पहुंचे? कैसे वो लखनऊ जैसे शहर में समाज में महिलाओं को लेकर ऊंचा उठा है? इस यात्रा में क्या वो अपने सिद्धांतों के साथ पाई है? क्या वो सही चीजें कर रही हैं या सोच के लिए भ्रष्ट राजनेताओं की लाइन आ गई है या अपने सिद्धांतों पर चल रही है, यह मकाम तक पहुंच पाई है। तो बहुत ही ग्रे अक्षरों का विवरण है। जैसे असल जिंदगी में एक इंसान होता है वैसे ही ये चरित्र है।’
मैं प्रोफेशनल हूं साउथ से खुश हूं
अलग-अलग भाषियों में काम कर चुकीं प्रीति बोलती हैं, ‘एक अभिनेता के तौर पर तो आप चाहते हैं कि आप एक ऐसी भाषा में काम करें, जिसमें आप आसानी से रहे, लेकिन आज कल ऐसा कोई बंधन नहीं है। तमिल और फिल्मों में काम करने का जो काम करता है या अच्छी चीज है कि आपको भारत का अलग रूप देखने को मिलता है। ज्यादातर फिल्मों में मैंने देखा है कि वे अपनी हिरोइनों को बहुत खूबसूरत तरीके से पेश करते हैं। मैं कहूँगा मैं पेशेवर पेशेवर दक्षिण से खुश। जब मैं साउथ में काम कर रहा था, तब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सिंगल प्रोफेशनल बिजनेस नहीं था। मैं दक्षिण में था तो मैंने देखा कि अगर 5 बजे तक समय होता है, तो लोग 5 बजे पहुंच जाते थे। कितने ही बड़े हीरो क्यों ना हों, हमेशा समय पर ही आते थे। मुझे याद है अधिपति के लिए हम स्विट्जरलैण्ड में शॉट कर रहे थे मोहन बाबू के साथ और वो समय के इतने पासबंद हैं। यदि कॉल टाइम 5:00 बजे है, तो 5:00 बजे वो वहां पर होगा और ऐसा नहीं है कि वो अपना विवरण करके चला जाता था। वो बाकी चीजों में भी साथ देते थे।’
गोविंदा जी की बराबरी करना बहुत मुश्किल है
चुनौतीपूर्ण किरदारों के बारे में बात करते हुए प्रीति कहती हैं, ‘मेरे लिए कॉमेडी काफी मुश्किल हो रही है।’ जब मैंने वाह क्या कहा’ में गोविंदा जी के साथ काम किया, तो चाह रहे थे कि हम पूरा कॉमिक सीन एक टेक में करें। हम सब जानते हैं कि गोविंदा जी जादू के कलाकार हैं। उनकी बराबरी करना बहुत ही मुश्किल है, लेकिन उन्होंने मुझे बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और हाल ही में दो कॉमिक सीन एक ही टेक में किए गए जो मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।’
अभिनेता पति होने की वजह से चीजें समझ नहीं पातीं
अपने अभिनेता पति प्रवीण दबास के बारे में वे कहते हैं, ‘दो अभिनेता जब साथ में रहते हैं, तो ये होता है कि काम की एक समझ होती है। वो मेरे काम को समझते हैं और मैं उनके काम को समझती हूं। मुझे ये जरूर लगता है कि अगर कोई इंसान बॉलीवुड से ना हो, वो एक एक्ट्रेस की जिंदगी कभी समझ ही नहीं। एक अभिनेता को खुद पर और उसकी जीवनशैली पर बहुत ध्यान देना पड़ता है। मुझे मेरे पति की तरफ से सपोर्ट मिलता है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि एक एक्टर कैसे काम करता है? मुझे लगता है, समझ ही है, जो आपके रिश्तों में प्यार करते हैं और अगर बात करें कि आम तौर पर हम क्या बातें करते हैं, तो ऐसा नहीं है कि हम हर घंटे सिर्फ फिल्मों की बात करते रहें। लेकिन ज्यादातर वक्त हम फिल्मों की बात इसलिए करते हैं, क्योंकि हमारा काम एक ही तरह का है। एक्टर के साथ शादी करना प्लस पॉइंट ही है, क्योंकि इससे कोई नुकसान नहीं है।’
मेरे कोई स्ट्रगल वाले दिन नहीं रहे
अपनी लंबी यात्रा के बारे में प्रीति कहती हैं, ‘मुझे बहुत अच्छा लगता है क्योंकि मैं कभी एक्टर नहीं बनना चाहती थी। मेरे परिवार में भी कोई फिल्म से कनेक्ट नहीं था। मैंने सोचा नहीं था कि मैं अभिनेता बनूंगी और आज जब कहती हूं कि बहुत अच्छे, बड़े अभिनेता और निदेशकों के साथ काम कर चुकी हूं, तो बहुत ही अच्छा लगता है। मेरा कोई स्ट्रगलिंग पीरियड नहीं हो रहा है। कोई ऐसा समय नहीं था, बोल मैं कहूं कि मैंने स्ट्रगल किया। सब कुछ मुझे आसानी से मिल गया। मैं हमेशा से मुंबई में ही था, मेरा घर था यहां पर। मी नो रेंट नहीं देना था। मैं बहुत लकी हूं कि काम मिला और अच्छा काम मिला। इसके लिए मैं हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा।’
दो लड़कों की मां बहुत चैलेंजिंग है
अपनी मदरहुड के बारे में वे कहते हैं, ‘मां नीला मेरी जिंदगी का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है। उससे भी ज्यादा चैलेंजिंग दो लड़कों की मां थी। हमारे देश में 2 बेटों का पालन-पोषण और नई अच्छी चीजें सिखाना आपकी में एक जिम्मेदारी का काम है। उन्हें सिखाना कि और की इज्जत करना है या यूँ कहें कि इंसानों की इज्जत करनी चाहिए। विशेष अच्छा बनना बहुत जरूरी है ना कि पैसा कमाना। हमारी लाइफ में लोग पैसे कमाने को ज्यादा अहमियत देते हैं और ये भूल जाते हैं कि खुशी उससे ज्यादा जरूरी है, तो मैं ये चीजें हैं, जो मैं अपने बच्चों को सिखाती हूं।’
‘मोहब्बतें’ मेरे लिए सबसे संस्कारी लम्हा है
अपने करियर के सबसे यादगार पल के बारे में उनका कहना है, ‘जब प्यार में आई तो बहुत ही देखने वाली थी। हमें पहले पता नहीं था कि अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय और शाहरुख खान के साथ काम करने को जाएंगे। जब ये नाम हमने सुना, तो खुशी का ठिकाना नहीं था और वो पल बहुत ही एक्साइटिंग था हमारे लिए। उसके बाद जब रोमांस रिलीज हुआ तो वो अलग ही जर्नी थी। हमने फिल्म में बहुत मेहनत की थी। हमारा जीवन यशराज ऑफिस के ही दूसरा पूरा चक्कर घूमता रहता है। 8-9 महीने हम वहीं थे और आज तक मैं उस फिल्म से जानी जाती हूं, तो इससे ज्यादा संस्कार और क्या हो सकता है मेरे लिए।’
परिवार के समर्थन के कारण रिजेक्शन अभियान चलाया गया
रिजेक्शन के बारे में वे कहते हैं, ‘एक वक्त था, जब मैंने फिल्म साइन कर ली थी, लेकिन बाद में पता चला कि वो फिल्म कोई और कर रहा था। मगर मुझे लगता है, मेरे लिए हमेशा परिवार का इतना समर्थन है और यही कारण है कि किसी भी रिजेक्शन और नाकामी का इतना अंतर नहीं है।’
निवेदन: तनु शुक्ला



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