
हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजकर करीब 35 मिनट पर दिन भर के लिए विश्राम कर दिया गया, वहीं की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे दिनभर के लिए रुक गई।
नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों में अडाणी मुद्दे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) पर घोषणा करने की संबंधित मांगों सहित विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध बुधवार को भी जारी किया जा रहा है। हालांकि, हफ्ते भर में हंगामे के बीच एक बिना चर्चा के गुजर गए। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की अगली बैठक अब तीन अप्रैल को होगी। हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजकर करीब 35 मिनट पर दिन भर के लिए विश्राम कर दिया गया, वहीं की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे दिनभर के लिए रुक गई। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में दोनों सदनों में एक बार भी प्रश्नकाल और शून्यकाल सामान्य व्यवस्था से नहीं पाया जाता है।
दोनों सदनों में बृहस्पतिवार को रामनवमी का अवकाश रहेगा, जबकि विभिन्न पक्षों के नेताओं के बीच आपसी सहमति के कारण शुक्रवार को बैठक नहीं होगी। शनिवार और रविवार को दोनों सदनों की बैठक नहीं होती है। 11 बजे अपराहन 11बजे कार्यवाही शुरू ही कांग्रेस समेत कुछ संबंधित पक्षों के सदस्य नारेबाजी करने और आसन के करीब पहुंच गए। याचिकाकर्ता सभापति भर्तृहरि महताब ने सदस्यों से अपने स्थान पर जाने और सदन चलाने की अपील की। उन्होंने कहा, ”सदने चलाने की जिम्मेदारी सिर्फ आसन की नहीं है, बल्कि हर सदस्य की भी है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कोर्ट ने 2019 के आपराधिक मानहानि के एक मामले में दो साल की सजा सुनाई है। इसके मद्देनजर शुक्रवार को राहुल की सदस्यता से असम्बद्ध भाषा में जाने के विरोध का स्वरूप कांग्रेस सदस्य सदन में लगातार तीसरे दिन काले कपड़े पहनकर आए। एक बार के धरने के बाद दोपहर 12 बजे से मीटिंग शुरू होने पर दो हफ्ते में ऐसा ही नजारा दिखा। इस काले परिधान में कांग्रेस सदस्य आसन के पास आकर ‘हमें जेपीसी’ के नारे लगाने लगे। हंगामे के बीच ही केंद्रीय वन, पर्यावरण और वन्य जीवन परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘वन संरक्षण (संशोधन) बनाए, 2023’ पेश किया। आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने भगवान में व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में लाने का विरोध किया। केंद्रीय मंत्री यादव ने बाद में दोनों सदनों के सदस्यों की एक संयुक्त समिति के विचार प्रस्ताव का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने यह प्रस्ताव भी रखा कि संयुक्त समिति आगामी संसद सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम कार्यदिवस तक अपनी रिपोर्ट देगी। सभा ने हंगामे के बीच ही ध्वनिमत से प्रस्ताव को स्वीकृति दी। वित्त मंत्री निर्मल ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ‘प्रतिस्पर्धा (संशोधन) कार्य, 2022’ को सदन में विचार और पास करने के लिए रखा। सदन ने हंगामे के बीच ही सभी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए यथासंशोधित सीमाओं को बिना किसी चर्चा के ध्वनि प्रदान किया। पीठासीन सभापति रमादेवी ने आसन के पास आकर शिकायत कर रहे हैं, विपक्षीगण शिकायत कर रहे हैं और अपने स्थान पर जाने का आग्रह करते हुए कहा, ”जनता ने आपको ऐसा करने के लिए नहीं भेजा है। जनता ने आपको वोट दिया है। अपने स्थान पर बोलिए। कार्यवाही चलाएं।” शोर-शराबा नहीं थमा तो वे कार्यवाही दोपहर 12 बजकर करीब 35 मिनट पर सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे के लिए रजेंस कर दी। राज्यसभा में भी बैठक शुरू होते ही कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने अडाणी समूह से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए जेपीसी करने की मांग करते हुए अटकना शुरू कर दिया।
कुछ सदस्य आसन के पास आकर चिल्लाएंगे। हंगामे के बीच ही सदनपति जगदीप धनखड़ ने सदन को सूचित किया कि उन्हें नियम 267 के तहत, कार्य संचालन कार्य अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आठ नोटिस मिले हैं। इसके आगे उन्होंने कुछ कहना चाहा, लेकिन हंगामे की वजह से वह अपनी बात नहीं कह पाए। वे सदस्यों से शांत रहते हैं और कार्यवाही करने की अपील करते हैं। लेकिन डोमन में व्यवस्था बनी न देखकर उन्होंने 11 बजकर करीब पांच मिनट पर बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए रुक गई। उच्च सदन की कार्यवाही एक बार रक्षा होने के बाद दोपहर दो बजे जब पुन: शुरू हुई तब कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों के सदस्यों की मांग को लेकर फिर से नारेबाजी करने। इसके बाद सभापति के आदेश पर केंद्रीय वन, पर्यावरण और वन्य जीव परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने ‘वन संरक्षण संशोधन, 2023’ के लिए संयुक्त समिति के गठन के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए राज्य के कुछ सदस्यों को इसमें नाम देने का प्रस्ताव रखा।
विशिष्ट के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल भी किया कि यह क्या हो रहा है? हालांकि उनकी पूरी बात शोरशराबे में नहीं सुनी जा सकती। इसके बाद, सभापति जगदीप धनखड़ ने दो बजकर करीब तीन मिनट पर सदन की कार्यवाही तीन अप्रैल, सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। उल्लेखनीय है कि 13 मार्च से शुरू किए गए बजट के दूसरे चरण के दौरान अभी तक दोनों सदनों ने सटीक के बजट और वित्त 2023 को बिना किसी चर्चा के ध्वनि की अनुमति नहीं दी है। बजट सत्र के दूसरे चरण के शुरुआती कुछ दिनों में सत्ता पक्ष ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लंदन में भारत के लोकतंत्र को लेकर दिए गए दावों पर विवादते हुए उनसे जोक की मांग को लेकर भारी जुर्माना लगाया। बाद में कोर्ट की अदालत ने राहुल गांधी को एक आपराधिक मानहानि के मामले में दो साल की सजा सुनाये जाने के बाद 24 मार्च को दिसंबर से अपनी सदस्यता रिपोर्ट जारी की। चिपकी अडाणी मामले में जेपीसी किए जाने की मांग पर बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत से ही सरकार दबाव बनाए रख रही है।
अस्वीकरण:प्रभासाक्षी ने इस खबर को निराशा नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआइ-भाषा की भाषा से प्रकाशित की गई है।



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