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पाकिस्‍तान की आर्थिक स्थिति अरबों डॉलर के लिए लड़ रहे पीएम-एफएम लेकिन फाइलों में घूम रही तीन गुना रकम, नौकरशाही की अड़चनें – International News in Hindi

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पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति: पड़ोसी देश जहां पाकिस्तान एक तरफ पाया-पाई को मोहताज है और विदेशी मुद्रा के लिए आईएमएफ से लेकर दूसरे देशों के अधिकार में कब्जा कर रहा है, वहीं पाकिस्तान में अधिकारियों की लाल फिटनशाही की वजह से अनिवार्य में ही 23 अरब डॉलर रुख रहे हैं। अगर ये पैसे सही समय पर पाकिस्तान को मिल गए तो देश की बड़ी आबादी के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा नहीं होता।

पाकिस्तान के अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, ये फंड ऐसे समय में पूरा हो जाता है, जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वित्त मंत्री ऐसाक डार आई झलक कार्यक्रम को फिर से जीवित करने के लिए 5 अरब से 7 अरब डॉलर की व्यवस्था करने की जद्दोजहद कर रहे हैं और उस कोशिश में आवाम पर भारी भरकम टैक्स का बोझ लाद रहे हैं।

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्यूरोक्रेटिक जैसी वजह से विदेशी कर्जदारों ने पाकिस्तान को करीब 23 अरब डॉलर के कर्ज और अनुदान का भुगतान रोक दिया है। ये कुछ 15 साल पुराने हैं। इसी खेप में केरी-लुगर एक्ट के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका से मिला 1.6 अरब डॉलर का अनुदान भी शामिल है।

अखबार ने लिखा है कि इस धन का एक बड़ा हिस्सा, जिसे सरकार “सितंबर 2022 तक” असंवितरित शेष “छोड़ती है, योजनाओं के तत्काल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करके प्राप्त किया जा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सप्ताह जारी आर्थिक मामलों के मंत्रालय की त्रैमासिक रिपोर्ट में इस फंड के बारे में खुलासा किया गया है, जिसमें अटकी योजनाओं के प्रोजेक्ट-वार विवरण और राशि का उल्लेख है। इन अटकी परियोजनाओं में अमेरिका, चीन, सऊदी अरब सहित कई देशों के अनुदान शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सूत्र के अनुसार, इतनी बड़ी राशि के पीछे सामान्य कारक सरकारी अनुमोदन की धीमी प्रक्रिया, ऋण वार्ता में देरी, खरीद विवरण को अंतिम रूप देने वाली सरकारी दावों के बीच सहयोग की कमी, लंबी बोली प्रक्रिया और निष्पादन की क्षमता की कमी और अनुबंध प्रबंधन और परियोजना की निगरानी में कमी है।

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Saurabh Namdev

| PR Creative & Writer | Ex. Technical Consultant Govt of CG | Influencer | Web developer
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