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करवाल ने कहा कि उत्तराखंड में 2013 में अचानक आई बाढ़, फरवरी, 2021 में सीमावर्ती शहर चमोली में हिमनद झील के फटने से आई बाढ़ और जोशीमठ तथा इसके आसपास के इलाकों में जमीन धंसने की घटना ऐसी हुई है जो पहाड़ी इलाकों में हुई हैं।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों में विशेष रूप से पर्वतारोहण टीम स्थायी रूप से रोकने पर विचार कर रही है ताकि वे हिमस्खलन, जोखिम और हिमनद झील के फटने से बाढ़ आदि के दौरान तेजी से बचाव अभियान शुरू करने के लिए तैयार हो जाएं सक्षम। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एंडी स्ट्रेच ने भारत के उत्तरी क्षेत्र में इन पर्वत श्रृंखलाओं में प्राकृतिक और मानव निर्मित अतिक्रमण से निपटने के लिए अपनी शक्तियों को तैयार करने के विशाल कई उपायों की शुरुआत की है। चीन से सीधी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की निगरानी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) करती है और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) एवं सीमा सुरक्षा बल (ओवरबोर्ड) नेपाल, भूटान और पाकिस्तान की सीमाओं की रक्षा करती हैं।
एंडी शेखी बघारते अतुल करवाल ने कहा कि बल पर्वतीय क्षेत्रों में घुसपैठ से समझौता करने के लिए कई कदम उठा रहा है क्योंकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं के होने का ”गंभीर” खतरा है। उन्होंने यह बात 19 जनवरी को यहां बल के 18वें स्थापना दिवस पर हाल के एक सत्र के दौरान ‘पहाड़ों में आपदा प्रतिक्रिया’ का आयोजन किया। करवाल ने कहा कि उत्तराखंड में 2013 में अचानक आई बाढ़, फरवरी, 2021 में सीमावर्ती शहर चमोली में हिमनद झील के फटने से आई बाढ़ और जोशीमठ तथा इसके आसपास के इलाकों में जमीन धंसने की घटना ऐसी हुई है जो पहाड़ी इलाकों में हुई हैं।
उन्होंने कहा, ”इस तरह की पहल के पहले से कहीं अधिक और विकराल रूप लेने की आशंका है और इसलिए एंडी रणनीतियों को इन हिस्सेदारी से समझौते के लिए तैयार रहना होगा। उत्तर के पहाड़ी क्षेत्र में, बल्कि अन्य स्थानों पर भी हमारी मदद का दावा। टोर में रहने के अभ्यस्त हो जाएंगे।
अस्वीकरण:प्रभासाक्षी ने इस खबर को निराशा नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआइ-भाषा की भाषा से प्रकाशित की गई है।
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