
बिहार में जहरीली शराब से हुई मौत के बीच नौकरों ने नौकरों पर लगाया शराबबंदी का शिकंजा। पूर्व डिप्टी सीएम एवं बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने शुक्रवार को कहा कि शराबबंदी से बिहार को 35 हजार करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। साथ ही जहरीली शराब की वजह से 1000 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद निवर्तमान सरकार शराबबंदी की समीक्षा क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर छपरा शराब त्रासदी में मरने वालों के आंकड़े छिपाने का भी आरोप लगाया।
बीजेपी नेता सुशील मोदी ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि बिहार को 35 हजार करोड़ का राजस्व नुकसान, जहरीली शराब से 1000 से ज्यादा लोगों की मौत और 6 साल में 4 लाख लोगों की जेल जाने के बाद भी क्या शराबबंदी की समीक्षा नहीं होनी चाहिए ? बीजेपी शुरू से पूरी तरह से शराबबंदी की नीति का समर्थन कर रही है, लेकिन सरकार इसे लागू करने में पूरी तरह से विफल है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नाकामी के कारण शराबबंदी ने पुलिस-प्रशासन के लोगों को 10 हजार करोड़ की अवैध कमाई की और चकाचौंध को खुली छूट दी। क्या इन बातों की समीक्षा नहीं होनी चाहिए ?
‘छपरा शराब कांड में आंकड़े छिपे हो रहे हैं, सरकार पर खतरा मंडरा रहा है’
सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि जहरीली शराब से हुई मौत के आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सारण जिले में जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 100 से ज्यादा हो चुकी है। राज्य सरकार के वास्तविक आंकड़े छिपे हुए हैं। मृतकों को पुलिस धमाका कर रही है, इसलिए लोग दूसरे स्थान पर जाकर अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
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सुशील मोदी ने कहा कि शराब पीने वालों पर परिवार का कोई जोर नहीं चलता। जहरीली शराब से मौत होने पर परिवार पर मुसीबतें टूटती हैं, इसलिए उन्हें योगा छोड़ना चाहिए। सीएम नीतीश कुमार गरीब, पिछड़ा, अतिपिछड़ा और पर्लिटिज समाज के विरोधी हो गए हैं। उन्हें सम्मान को सम्मान का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए।



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