
पेट को जब भूख का एहसास होता है, तो मन धीरे-धीरे कुछ खाने के लिए उत्तेजित होता है। पर कभी-कभी पेट भरा होने के बावजूद आपको कुछ खास खाने का मन करता है। क्रेविंग ने ऐसा ही कहा है। क्रेविंग या कुछ खाने के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों की तुलना में ज्यादा क्रेविंग होती है और इसी वजह से वे अनहेल्दी प्लेटफॉर्मिंग की शिकार हो जाती हैं। चलो आहार और विशेषज्ञ आहार सक्सेना से जानते हैं क्रेविंग के बारे में विस्तार से।
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जानिए महिलाओं को क्रेविंग क्यों ज्यादा होती है
आहार विशेषज्ञ कहते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को जंक, शिकार या तय किए गए भोजन की क्रेविंग होती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उनके स्वास्थ्य में बढ़ा-चढाव का ज्यादा होना। हर महीने पीरियड्स के कारण, फिर प्रेग्नेंसी और उसके बाद मेनोपॉज महिलाओं में चढ़ाव के प्रमुख कारण होते हैं। इन सभी बातों में उनका मन कुछ मनचाही चीजों को खाने का कर सकता है।
यहां जानिए क्रेविंग के दो नीचे के बारे में
1 सेलेक्टिव क्रेविंग्स
पोषण विशेषज्ञ कहते हैं कि जब किसी व्यक्ति के शरीर की भूख मिटाने वाले खाद्य पदार्थों का मन हो जाता है और वह भोजन आपके पहले से ही त्याग कर लेता है, तो इसे सालेक्टिव क्रेविंग्स की श्रेणी में रखा जाता है। अपका मन किसी रेस्तरां का राशिफल खो गया है, शाही नाश्ता खाने का है, पेटीज या आलू की रेसिपी से बना कोई खाद्य पदार्थ खाने का हो सकता है।
इसलिए जब भी भूख लगे, तब यह भी ख्याल रखना चाहिए कि शरीर को क्या भोजन से भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिलेंगे। क्रेविंग मिटाने के लिए जंक फूड का सेवन करना आपको अनहेल्दी बना सकता है। इससे बचना जरूरी है।
2 सेलेक्टिव
नॉन-सेलेक्टिव क्रेविंग का मतलब हुआ जब आपको भूख लगने लगी और यह पक्का नहीं हो रहा है कि भूख मिटाने के लिए क्या खाना उचित रहेगा। ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा जल्दबाजी में आप कुछ भी खा लेते हैं। पोषण विशेषज्ञ कहते हैं कि जब इस प्रकार क्रेविंग हो, तो पहले पेट भर पानी पी लेना चाहिए। आप कुछ पेय पदार्थ भी ले सकते हैं। किसी भी शरीर को किसी भी तत्व की पहुंच से बचा जा सकता है।
यहां जानिए हेल्दी-अनहेल्दी क्रेविंग के सामान्य कारण (लालसा के सामान्य कारण)
1 गर्भावस्था (गर्भावस्था)
प्रेग्नेंसी गर्भावस्था के दौरान होने वाले हॉर्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं का जुड़ाव और स्वाद में फर्क हो सकता है। इस दौरान उन्हें कुछ खाने का मन भी करेगा। जिससे आप चाहकर भी रोक नहीं पाएंगे।
2 प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम)
विशेषज्ञ बता रहे हैं कि सीक्वेंस से पहले बॉडीज में रैप्स और प्रोजेस्टेरोजन में बदलाव होने के कारण शरीर को कार्ब्स का सेवन करने की क्रेविंग बढ़ जाती है। इससे आप अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन करते हैं।
3 नींद की कमी (नींद की कमी)
जब भी आप सोने का प्रयास करेंगे तो नींद नहीं आएगी, या जब रहेगी तो अच्छी गुणवत्ता नहीं होगी। नींद के लिए जिम्मेदार हार्मोन आपकी नींद को खराब केविंग्स के कारण कर सकता है विशेष रूप से यह शाम के समय होगा, जब भूख अधिक लगेगी।
4 ज्यादा तनाव (अधिक तनाव)
स्ट्रेस बॉडी में हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ाया जाता है। कोर्टिसेल अधिक होने से भूख, लालसा, किसी चीज को जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिए खुद पर कंट्रोल करना जरूरी है।

5 जल्दबाजी में खाने के गलत विकल्प
जब आप कोई काम कर रहे होंगे, तो भूख अधिक लगेगी। इस दौरान आपका खाने का तरीका बदला रहेगा। जो खाने का मन करेगा, वह अवलोकन संबंधी मन नहीं भरेगा। इसे रोकने के लिए दिमाग से और संतुलन का सहयोग लें।
6 पोषण की कमी (पोषण की कमी)
स्वभाविक है कि खाने की इच्छा इस बात की ओर इशारा करती है कि शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी है। उदाहरण के लिए नमक की क्रेविंग होने पर सोडियम का सेवन करने का मन करता है। वहीं, अधिकांश लोग खाने के लिए रहते हैं, लेकिन उनमें पोषक तत्वों की कमी नहीं होती।
इसके अलावा अगर पोषक तत्व की कमी के कारण क्रेविंग हो रही है, तो जरूरी है कि आप पोषक तत्व से भरपूर पोषक तत्व जैसे कि सर्दियों, अंगूर के दाने या फलियों की तरफ आकर्षित हों।
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