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लंबे समय से व्रत रखते आ रहे लोगों के लिए अचानक से उपवास न रखना बहुत मुश्किल होता है। धार्मिक भावनाओं की वजह से लोग हर कठिन परिस्थिति में भी उपवास रखने के लिए तैयार रहते हैं। ठीक इसी तरह से अक्सर महिलाएं ऐसी दुविधा में फंस जाती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ आमतौर पर महिलाओं को गर्भावस्था में उपवास न करने की सलाह देते हैं। लेकिन यदि कोई महिला फिर भी व्रत (गर्भावस्था में उपवास) रखना चाहती है, तो उन्हें अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
अधिकतर उपवास 1 से 2 दिन के होते हैं। ऐसे में शॉर्ट टर्म फास्टिंग ज्यादा नुकसानदेह नहीं होती। लेकिन नवरात्र के इस महापर्व में गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए 9 दिन का व्रत रखना (गर्भावस्था में उपवास) खतरनाक हो सकता है। छोटी सी मां और बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए इस दौरान आपके संबंध का विशेष ध्यान रखा जाता है।
वीडियो दृश्यों ने इस विषय पर एचएन रिलायेंस फ़ाउंडेशन हॉस्पिटल के डायरेक्टर एब्सटेट्रिक्स गायनेक डॉ. आशा दलाल से बातचीत की। आइए जानते हैं वेजेन्सी में फास्टिंग (प्रेग्नेंसी में फास्टिंग) के लिए क्या सलाह देते हैं।
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दूसरी तिमाही में फास्टिंग का जोखिम कारक हो सकता है
जानकार कहते हैं कि “गर्भवती महिलाओं को अपने और अपने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उपवास नहीं रखना चाहिए। वहीं यदि आप जेस्टेशनल हैं, तो आपको विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। फिर भी आप वजन कम करने के लिए उपवास कर रहे हैं या धार्मिक कारणों से यह व्यक्तिगत पसंद है। लेकिन दूसरी तिमाही में उपवास करने से प्रीटर्म लेबर हो सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि “यदि किसी गर्भवती महिला को लंबे समय तक उपवास रखा जा रहा है, जैसे कि नवरात्र के 9 दिनों के उपवास, तो आपको पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता होती है। ऐसे में इसकी जानकारी के लिए आपकी जानकारी अनिवार्य है। यदि व्रत रखने की सोच रही हैं, तो याद रखने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपवास के दौरान अच्छी तरह से लाइव रहें।”
हाइड्रेशन से बचना जरूरी है
सारा खून का पानी, दूध, लस्सी या घास का जूस पिएं। साथ ही प्रोटीन और फैटी एसिड से भरपूर सूखा मेवा और मखाना का सेवन करें। वहीं फाइबर युक्त शकरकंद, आलू या साबुदाना जैसे पदार्थ पदार्थों का सेवन करें। ऐसे खाद्य पदार्थ आपको लंबे समय तक बनाए रखते हैं।
उपवास के दौरान भी उपवास के दौरान डिहाइड्रेशन के लक्षण जैसे कि चक्कर आना या गहरे रंग का पेशाब होने पर फोरन ध्यान दें। क्योंकि यदि आप कम पानी पीते हैं, तो यूरिन इन्फेक्शन का खतरा भी बना रहता है। साथ ही थकान महसूस होने पर शरीर को पर्याप्त आराम दें।

नवरात्र के 9 दिनों के लंबे उपवास पर हैं, तो इस तरह डाइट प्लान करें
1. वैज्ञानिकों के अनुसार प्रेग्नेंसी में पूरे दिन रुकना नहीं चाहिए। ऐसे में हर 4 से 5 घंटे पर कुछ न कुछ चौराहों पर।
2. व्रत के घंटे के दौरान जितना हो सके उतना अधिक पानी पिएं। साथ ही अन्य फीमेलिंग फूड्स का सेवन कर सकते हैं।
3. व्रत के दौरान तेल की जगह खाद्य पदार्थों को बनाने में घी का इस्तेमाल ज्यादा लाभ रखेंगे।
4. एक उचित समय के बाद साबूदाना, कुट्टू, अमरनाथ, सामक जैसे खाद्य पदार्थों से बने शुद्ध व्यंजन का सेवन कर सकते हैं। क्योंकि फाइबर युक्त ये खाद्य पदार्थ आपको लंबे समय तक बनाए रखते हैं। साथ ही पर्याप्त पोषण प्रदान करते हैं।
5. खुद का दूध, चटनी, बटर मिल्क, लस्सी और दही का सेवन कर सकते हैं। यह आपको पूरे दिन तरोताजा रहने में मदद करेगा। हालांकि, दायरे के उत्पाद भी कई बार कब्ज का कारण बन जाते हैं, इसलिए एक दिन में ही इसे अपनाएं।

प्रेग्नेंसी में उपवास तोड़ते समय न करें इन खाद्य पदार्थों का सेवन
कैफीन युक्त पेय से अपना उपवास न तोड़े। यह आपके शरीर को डिसाइड कर सकता है। वैसे भी गर्भावस्था में कैफीन का सेवन सीमित रखा जाना चाहिए।
डॉक्टर के अनुसार अम्लीय और संबंधित पदार्थ से व्रत न लक्षण। यह एसिडिटी और हार्ट बर्न का कारण बन सकता है।
बहुत अधिक खाने-पीने की चीजों से भी व्रत न लक्षण क्योंकि ये आपको इंसेंटेंट एनर्जी देते हैं लेकिन लंबे समय तक एक्टिव नहीं रखते।
उपवास तोड़ते इन पदार्थों का सेवन करें
डॉक्टर के अनुसार गर्भावस्था में विटामिन, धब्बे, आयरन और कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों से व्रत करते हैं।
उपवास तोड़ने के लिए धीरे-धीरे धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थ जैसे कि होल वीट स्नैक्स, ओट्स, बींस, दाल, अनसाल्टेड लाइट, होल मिल ब्रैड आदि का सेवन करें।
इसके साथ ही मात्रा में पानी पियें। क्योंकि फ्लो की कमी आपको कब्ज का शिकार बना सकती है। शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी होने से आपके उच्च फाइबर खाद्य पदार्थों को आसानी से पचाया जा सकता है।
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