
लगातार बढ़ रही वायरल और खराब हार्ट हेल्थ की हमारी डाइट से बहुत सी चीजों में कटौती की जाती है। इन्हीं में से एक शुगर है। कोई भी मिठाई रेसिपी में हम चीनी निवेश से हाथ पीछे की ओर रख रहे हैं। निश्चित है, चीनी हमारी हेल्थ को प्रभावित करने का काम करती है। वहीं, बिना मिठास के रेसिपीज अधूरी सी लगती है। रिसर्च गेट के मुताबिक ये स्वीटनर्स अनरिफाइंड प्रोडक्ट्स (अपरिष्कृत उत्पाद) हैं। ये प्लैट सर्टिफिकेट से प्राथमिक तत्व और बायोएक्टिव कम्पाउंड पाए जाते हैं। दक्षिण पूर्व एशिया में जॉबर गन्ना, ताड़ यानी पाम और नारियल से मिलने वाली शुगर अनरिफाइंड (नारियल चीनी बनाम पाम चीनी) होने के साथ साथ स्वाद में भी बेहद खास होती है।
नारियल चीनी
इसके बारे में फिलीपींस खाद्य और पोषण अनुसंधान संस्थान की एक खोज में यह दावा किया गया है कि अधिशेष चीनी की कम्पैरिज़न में नारियल चीनी में जाइन, आयरन और कैल्शियम अधिक पाया जाता है। इसके अलावा चीनी नारियल में न्यूट्रिएंट्स जिसमें पॉलीफेनोल्स, फ्लेवोनोइड्स और एंथोसाइनिडिन जैसे कार्य की भी उच्च मात्रा पाई जाती है।
कैसे बनाया जाता है नारियल चीनी
नारियल के पेड़ पर लगे पेड़ों से नारियल की चीनी यानी कोकोनट शुगर (Coconut sugar) प्राप्त होती है। इसके लिए फूलों को काटकर उनमें मौजूद तरल पदार्थों को निकाल दिया जाता है। उसके बाद पदार्थ तब तक धीमे-धीमे चलते रहते हैं, जब तक उनका अस्तित्व पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता। उसके बाद बोट्स के तले पर भूरे रंग का शुगर कंटेट दृष्टि आती है। इस तरह तैयार होने वाली शुगर के संपर्क में आते हैं। इससे गुड्डे बनाने के लिए बड़े-बड़े निशानों की प्रक्रिया की जाती है।
जानिए, कोकोनट शुगर के फायदे
रक्तचाप को नियंत्रित करता है
हमारी बॉडी एनर्जी के लिए ग्लोक्ज़ की मदद करती है। ऐसे में कई पोषक तत्वों से भरपूर कोकोनट शुगर न केवल लो ब्लड प्रेशर को रोकने वाली बल्कि ब्राउन शुगर और गन्ने तैयार होने वाले समान ही ब्लड प्रेशर को बरसाने का काम करती है। हाइपोग्लाइसीमिया जैसी जोखिम से बचाने में भी मदद करता है।
पोषक तत्वों से भरपूर है
एंटी-ऑक्सीडेंट (एंटी-ऑक्सीडेंट) से भरपूर शुगर में फाइबर भी उच्च मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा हल्के भूरे रंग की महीन दानों वाली इस शुगर में कैलोरी बहुत कम होती हैं, जो डाइटिंग के दौरान लाभ साबित होता है। इसमें फ्रुक्टोज (फ्रुक्टोज) भी पाया जाता है। जब कि साधारण चीनी में से कुछ भी नहीं मिलता है।
पाचन में सुधार करता है
गट हेल्थ का भी बर्ताव है। इसके सेवन से व्यापक रूप से जुड़े हुए खतरे का खुद से कम होने का खतरा है। दरअसल, इसमें मौजूद इंसुलिन शरीर में प्रीबायोटिक्स के तौर पर काम करता है।
अब जानते हैं पाम शुगर के बारे में
कोकोनट शुगर की तरह ही पाम शुगर भी दक्षिण पूर्व एशिया के बड़े तादाद में पाई जाती है। दोनों ही आपस में स्वीटनर हैं, जो चश्मा से ही प्राप्त होते हैं। पाम शुगर ताड़ के पेड़ से निकलने वाले रस से प्राप्त होता है। इस रस को धीमी आंच पर रखा जाता है, जब वो सूख जाता है, तो शुगर नीचे रह जाती है।
क्या हैं पाम शुगर के फायदे

ये स्थिर नज़रिया है
ताड़ शुगर एक मूड स्थिरता के तौर पर काम करता है। इसमें मौजूद कैरीमल टेस्ट आपके शरीर में हैप्पी हारमोन्स जारी करता है। इससे आपका मूड अच्छा होता है और आप ज्यादा प्रोडक्टिव फील करते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद कार्ब्स आपको एनर्जी से भर देते हैं।
एंटी बॉडीज़ के विकास में पूर्ति
इसे खाने से शरीर में रेड ब्लड सेल्स और एंटी बॉडीज का विकास होता है। इसमें मौजूद विटामिन बी 6 बॉडी को हेल्दी रखने का काम करता है। साथ ही पोतों की समस्या से भी राहत मिलती है।
कोकोनट शुगर या पाम शुगर जानिए आपके लिए दोनों में से क्या ज्यादा बेहतर है
इस बारे में मनिपाल हास्पिटल गाजियाबाद में हेड ऑफ न्यूट्रीशन एंड डाइटेटिक्स डॉ अदिति शर्मा का कहना है कि ये दोनों ही तुलनात्मक शुगर है। कोकोनट शुगर का ग्लाइसेमिक पाम शुगर से थोड़ा ही कम होता है। दोनों में ही विटामिन, रसायन, पोटेशियम और सोडियम पाए जाते हैं। इन दोनों को ही किसी प्रकार की रिफाइनिंग की आवश्यकता नहीं है। इसका उपयोग किया जा सकता है, मगर एक सीमित मात्रा में। कोकोनट शुगर को नींबू में परावर्तित किया जा सकता है।
नारियल की चीनी नारियल के फूलों की कलियों में मौजूद तरल पदार्थों से बनाया जाता है। जबकि पाम शुगर पाम के ट्रंक सैप से तैयार हो जाती है। निर्माण प्रक्रिया के बाद कोकोनट शुगर का रंग हल्का भूरा होता है। कई बार इसे आकर्षित करने के लिए निर्माता इसमें कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल करते हैं। जो किसी की भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। जबकि पाम शुगर का रंग गहरा गहरा भूरा होता है।
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