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भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला एक ऐसा देश है, जहां लोग अब भी सेक्स के बारे में बात करते हैं झकझोरते हैं। हांलाकि कभी-कभी शिकायत पर कुछ ऐसे स्वर ज़रूर सुनाते हैं, जो इस मुद्दे पर अपनी विचारधारा रखने की हिम्मत रखते हैं। ऐसी ही एक आवाज है सेक्शुअल हेल्थ एडुकेटर करिश्मा स्वरूप (यौन स्वास्थ्य शिक्षक करिश्मा स्वरूप) की, जो न केवल लोगों को सेक्स के बारे में शिक्षित कर रहे हैं, बल्कि भारत में सेक्सुएलिटी के अन्य रेख ब्लॉग को भी तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
अपने कॉलेज के दिनों में एक छात्र सेक्सुअल हेल्थ एडुकेटर से मिलने के बाद करिश्मा का पूरा जीवन बदल गया। उस समय का करिश्मा को ये एहसास हुआ कि वे लोगों को उस विषय पर एजुकेट करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे पेट्रीफाइंग माना जाता था। साथ ही उचक्ता के बारे में फ्रैंक बोलने वाले लोगों को नीचा मानते हैं। एज्मा ने पत्रकारों से अपनी आवाज़ उठाने और अपनी सुंदरता को अभिव्यक्त करने के उद्देश्य से एक महिला की शुरुआत की। क्लैमा मिथ्स को दूर करने और सेक्स, आनंद, अतरंगता, संभोग, मासिक धर्म और यौन स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए एक इंस्टाग्राम पेज चलाए जाते हैं – जिसे @talkyounevergot नाम दिया गया है।
वीडियो शॉट्स के साथ इस विशेष बातचीत में, शर्मसार स्वरूप ने एक सेक्स एडुकेटर के रूप में अपनी हरकतों, संघर्षों और आगे बढ़ने की रणनीति के बारे में बात कर रहे हैं। साथ ही ट्रोलर्स और आलोचना करने वालों से कैसे कहा जाता है, यह भी।
यौन स्वास्थ्य शिक्षक बनने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?
क्रोमा स्वरूप बताते हैं कि अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी से तालीम हासिल करने के दौरान उनकी यात्रा एक सेक्सुअल हेल्थ एजुकेटर के तौर पर शुरू हुई। पहली सेल के दौरान मेरी मुलाकात एक ऐसे छात्र से हुई, जो हाई स्कूल के छात्रों को सेक्स एजुकेशन देता था। ये जानकर मैं प्रत्यक्ष अंचभित हो गई थी। दरअसल, मेरी पढ़ाई एक ऐसा कर्सवेटिव हाई स्कूल में हुई थी, जहां बायोलॉजी के बारे में चर्चा होती थी, मगर सेक्सुएलिटी के विषय पर कभी भी फ्रैंक बात नहीं हुई थी।
एक साल बाद, मुझे एहसास हुआ कि मेरे बारे में और जानकारी इकट्ठी की जानी चाहिए। इसके चलते मैंने अमेरिका के एक बड़े संगठन के साथ पेरेंटहुड के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया और हाई स्कूल के छात्रों को सेक्स एजुकेशन की शुरुआत की।
वास्तव में सेक्स पॉज़िटिविटी या सेक्स पॉज़िटिविटी क्या है?
सेक्साइटी उचता के चारों ओर नकारात्मकता को दूर करने के लिए चला गया एक आंदोलन है। इसके तहत यह जानना आसान होता है कि लोगों की नजऱ में कामुकता किसे कहते हैं। इसका मतलब सेक्स करना हो सकता है या फिर सेक्स नहीं हो सकता। कुछ होश से मास्टरबेशन को सेक्स से जोड़कर देखा जा सकता है। सेक्स पॉज़िटिविटी का मतलब उन संस्करणों या ब्लॉगज़ को तोड़ना है, जो हमें इस मुद्दे पर फ्रैंक बात करने से रोक रहे हैं। ये कारण होगा कि ये बात पूरी तरह से सामान्य है। एक ऐसा विषय जिस पर लोग विचार कर सकते हैं, सीख सकते हैं और आगे बड़ी बात कर सकते हैं।
सेक्स के बारे में सबसे बड़ा संस्करण क्या है जो अभी भी मौजूद है?
हमारे समाज में ऐसा धारणा है कि वर्जिनिटी को प्योर और संरक्षित करके जरूरी है। इस एक महिला के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। जब हम इस बारे में बात करते हैं तो हमें इस बात को स्वीकार करना होगा कि हमारे देश में सेक्स को संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है। यहां पर अगर कोई महिला बच्चा पैदा करने के अलावा किसी और वजह से सेक्स कर रही है, तो उसे गलत समझा जाता है और प्रति उसका समाज का रवैया नकारात्मक हो जाता है। जब भी सेक्स को लेकर समाज में बढ़ रहे मतभेद पर बात होती है तो धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को अलग नहीं किया जाता।
यौन स्वास्थ्य शिक्षक के रूप में अब तक आपके सामने सबसे बड़े लक्षण क्या हैं?
सबसे बड़े हैशटैग में से एक था इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर अपनी पहचान को बनाए रखें। दरअसल, महामारी के दौरान हम लोगों का ऑनलाइन काम होने लगा था। इसके लिए हम आसानी से बहुत से लोगों तक पहुंच सकते हैं और उनसे बातचीत कर सकते हैं। बहुत से लेगों तक पहुंचने का अर्थ ये कतई नहीं था कि मैं उन्हें इस विषय पर कटाक्ष करने का मौका देता हूं। इसके चलते मुझे लंबे समय तक डी.एम. और गैर-ज़रूरी इमेजिज़ के लिए ट्रोलिंग को बढ़ावा मिला।
किसी कारण से यौन शिक्षा को अनावश्यक है। इसके कारण मुझे सेंसरशिप से जुझना पड़ा। दरअसल, यह एक ऐसा मंच है, जहां पर इस बात पर जोर दिया जाता है कि कोई वीडियो कैसा दिखता है। उनके मुताबिक इस तरह के वीडियोज किसी भी मेंटल हेल्थ को खराब कर सकते हैं। इसके चलते सोशल मीडिया पर कई बार ट्रोल भी होना पड़ा। इस तरह की कंडीशन से निपटने के लिए मेरा परिवार हमेशा मेरे साथ खड़ा रहा।
क्या उदार समाज (अमेरिका) की तुलना में अधिक रूढ़िवादी समाज (जैसे भारत) के दर्शकों में भारी अंतर था?
पहली बार जब मैं भारत वापस लौटा, तो मुझे लगा कि मैं उन लोगों से मिलने जा रहा हूं, जिन चीजों के बारे में लोगों को जानने के लिए, उनमें से बहुत से लोग होंगे। फिर समय के साथ एहसास हुआ कि यहां भी लोग उसी तरह के कांटेंट पढ़ रहे हैं, जैसा कि अमेरिका में पढ़ा जा रहा है। चाहे आप अमेरिका में हैं या आप भारत में हैं, ये सेक्स को लेकर लोगों में जो कुछ मील हैं, वो एक ही जैसे हैं।
अमेरिका में जो एक बड़ा अंतर देखने को मिला, वो ये है कि कंडोम के बाउल के साथ हम किसी भी क्लासरूम में इंटर कर सकते हैं। इसके अलावा इस विषय पर फ्रैंक बातचीत भी कर सकते हैं। वहीं भारत में कई सी पाबंदियों के चलते स्कूल और इस्टीट्यूटस में सेक्स पर बातचीत करने को लेकर सेंस का अनुभव किया जाता है।

आपकी नजर में यौन स्वास्थ्य के बारे में अब भी सामाजिक रूप से हम कहां पिछड़ रहे हैं?
सेक्शुअल हेल्थ की जब बात आती है, तो भारत में काफी लैदरिंग नजर आती है। हमारी सोसायटी में हर ओर टैबूज़ नज़र आते हैं। बहुत कम जगह है, जहां सेक्स के बारे में फ्रैंक और नॉन जजमेंटल बात की जाती है। इसलिए ही नहीं, यदि आपके पास स्नैप्स के संपर्क में आते हैं, तो वे मानेंगे कि यदि आप विवाहित नहीं हैं, तो आपको सेक्स के बारे में कोई जानकारी नहीं होगी और न ही आप यौन क्रियाएं करेंगे। इस बात को कन्फर्म किए, ब्लॉग वे आपसे कई तरह की जानकारियां साझी करने वाले हैं।
दरअसल, हमारे समाज में युवा यौन रूप से सक्रिय हैं, मगर उनकी देखरेख करने के उपाय नहीं हैं। अरबन एलिट सोसाइटी में भी यही समस्या देखने को मिलती है। वहीं, जब रूरल सेक्सुअल हेल्थ की बात आती है तो ये पूरी तरह से अलग हो जाता है। हमारे देश ने राज्य में परिवार नियोजन, गर्भनिरोधक, जनसंख्या को कम करने आदि में बहुत निवेश किया है। मगर लोगों के यौन स्वास्थ्य को लेकर कोई महत्व नहीं दिया गया है। ग्रामीण में रहने वाले लोगों तक अब भी चक्र साइकिल हाइजीन उत्पाद और स्वच्छ पूर्वाश्रम जैसी चीजें नहीं आती हैं। सोचने वाली बात यह है कि जब तक वे मासिक धर्म पर बात करने में सक्षम नहीं हैं, तब तक वे यौन स्वास्थ्य से जुड़ी बातों पर तर्क विर्क नहीं कर पाएंगे।
उन महिलाओं के लिए आपका क्या संदेश है जो यौन शिक्षा को एक सफल व्यवसाय के तौर पर अपनाना चाहती हैं?
घोषणा करती हैं कि मेरी आवाज पर गारंटी करो और आज की महिलाओं के लिए यही मेरा मैसेज है। कई बार, हम समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक प्रणाली से दुखी और निराश महसूस करने लगते हैं। वहीं दूसरी ओर एक मां की परवरिश और देखभाल करना एक बहुत ही अच्छी बात है। मगर फिर भी कई सी बातें इस बात पर आकर रूक जाती हैं कि एक महिला क्या चाहती है।
हमें डाकिया चाहिए कि एक महिला क्या चाहती है, क्या महिलाओं की जल्दी शादी किसी को भी उनसे किससे शादी करनी चाहिए, वह क्या हिटरसेक्सुअल हैं और क्या नहीं। कई बार महिलाओं को गहराई से पता चलता है कि वे क्या चाहती हैं और क्या नहीं। मगर वे खुद पर भरोसा करने में असमर्थ हैं। महिलाओं को अपनी आवाज निकालना, गुस्सा करना, दुखी होना और निराश होने के सभी अधिकार हैं। क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करेंगे, तो कोई और आपके लिए स्टैण्ड नहीं लेगा।
(करिश्मा संदर्भ को सेक्शुअल हेल्थ एडुकेटर श्रेणी में हेल्थ व्यू शी स्लेज़ अवार्ड्स के लिए नियुक्त किया गया है। उनके लिए वोट करने के लिए या हमारे अन्य भाषाओं के बारे में जानने के लिए, कृपया इस लिंक पर क्लिक करें – शी स्लेज प्राप्त करें!



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