
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत
नई दिल्ली। विनाश परिवर्तन से उत्पन्न हुए पर्यावरण के खतरों के मद्देनजर जी-20 सम्मेलन में भूमि संरक्षण और संसाधनों का प्रभावी उपयोग भारत के लिए दो अहम मुद्दे होंगे। भूमि, जैव विविधता की हानि, समुद्री प्रदूषण, मैंग्रोव व कोरल रीफ का संरक्षण, संसाधनों का अति उपयोग और कूड़े के निस्तारण में खामी वे अहम पर्यावरण चिंताएं हैं, जिनके समाधान की कोशिश भारत की अध्यक्षता में जी-20 की प्राथमिकता होगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत पर्यावरण अनुकूल जीवन को बढ़ावा देंगे और जी-20 में गतिविधि विकास प्रतिमान को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य जी-20 की अध्यक्षता करने के दौरान दृश्य परिवर्तन से समझौता और सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए एक एकीकृत, व्यापक और संस्थाओं से संचालित दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। अधिकारियों ने बताया कि वित्त वित्त के मुद्दों पर भी चर्चा में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत जी-20 के अध्यक्ष के दौरान ”देशी नागरिकता से समाधान के लिए जी-20 मसौदा’ स्वीकार करना और ”जी-20 ऑनलाइन ज्ञान और समाधान-उपलब्ध मंच’ के विकास को बढ़ावा देना होगा। अधिकारियों ने बताया कि भारत समुद्री सागर का सह लाभ के साथ बेहतरीन प्रबंधन, स्थायी विकास लक्ष्य 14 के लिए वित्त व्यवस्था करने के लिए ‘समुद्र 20 बातचीत’ करना चाहता है। इसका उद्देश्य समुद्र, सागर और समुद्री संरक्षण का संरक्षण और स्थायी उपयोग है।
बैंगलोर में 9 फरवरी से पहली बैठक
शेरपा ट्रैक के लिए कार्य नहीं कर रहा 13 कार्यवाहक से एक पर्यावरण वैश्विक स्थिरता कार्य समूह फरवरी और मई के बीच चार बार बैठक करेगा। पहली बैठक बैंगलोर में नौ से 11 फरवरी के बीच होगी, दूसरी बैठक गांधीनगर में 27 से 29 मार्च के बीच प्रस्तावित है, तीसरी बैठक मुंबई में 21 से 23 मई के बीच होगी और चौथी बैठक के लिए चेन्नई को चुना जाएगा, जहां 26 और 26 को चेन्नई को चुना जाएगा। 27 मई को समूह की बैठक प्रस्तावित है। ग्रुप के मंत्रिस्तर की बैठक 28 जुलाई को चेन्नई में आयोजित की गई योजना है। अतिरिक्त सचिव ऋचा शर्मा ने कहा, ”भूमिगत गहराई, जैव विविधता को हो रही हानि को रोकने और अधिकारियों को बहाल करने की अतिसंवेदनशीलता की आवश्यकता है क्योंकि दुनिया की 23 प्रतिशत भूमि अब संसाधनों के अतिदोहन और बंजर होने की वजह से कृषि उत्पादन के अनुकूल नहीं है है।” सितंबर 2020 में जारी ‘डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ‘लिविंग प्लांट रिपोर्ट’ के मुताबिक साल 1970 से अब तक स्तनपायी, रैप्टर, उभचर, सर्पों और फिश की संख्या में गिरावट आई है। अधिकारियों ने बताया कि दूसरी प्राथमिकता स्थायी और जीवीकरण अनुकूल उद्योग है।
सर् धर्मनिरपेक्ष उद्योग
रिचा शर्मा ने बताया कि भारत नीली उद्योग के लिए नीति बनाने के अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, ”यह अहम मामी है और हम इंडोिशया की अध्यक्षता से इसे जारी करना चाहते हैं। इसलिए समुद्री योग, मैंग्रोव और कोरल रीफ का सरंक्षण वे मुद्दे हैं जिन पर भारत की अध्यक्षता के दौरान चर्चा होगी।” अधिकारी ने बताया कि भारत विशेष रूप से समुद्र में जन्म के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना चाहता है और वह निर्देशित समुद्र तट सफाई अभियान शुरू करेगा जिसमें G-20 समूह के सभी देश और अतिथि देश 21 मई को हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि तीसरी प्राथमिकता का उचित उपयोग और ‘सामाजिक समाजीकरण’ सरकार की एक अन्य प्रमुख नीतिगत प्राथमिकता है।



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