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यहां मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले 8 खाद्य पदार्थ हैं।

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अक्सर हम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (ग्लाइसेमिक इंडेक्स) के बारे में संख्या में हैं। तो क्या आपने कभी इसके बारे में जानने की कोशिश की है। यदि नहीं तो आपको यह बताना है कि यह खाद्य पदार्थों में मौजूद कार्बोहाइड्रेट का कांच है। यदि आपके खाद्य पदार्थों का ग्लाइसेमिक अधिक होता है, तो यह आपकी सेहत के विभिन्न रूपों को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से दिखने की स्थिति को काफी अधिक गंभीर कर देता है। ऐसे में हमेशा लोग ग्लाइसेमिक आहार (कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ) का सेवन करने की सलाह देते हैं।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए हेल्थशॉट्स में ग्लाइसेमिक फूड्स के बारे में न्यूट्रीफाई बाई पूनम डाइटिंग एंड वैलनेस क्लिनिक एंड अकादमी के डायरेक्टर पूनम दुनेजा से बात की। वे कई लोग ग्लाइसेमिक फूड्स (कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ) के नाम सुझाते हैं। तो जानिए, ऐसे 8 खाद्य पदार्थों के बारे में वास्तव में ग्लाइसेमिंग जमा बहुत कम है।

क्या है ग्लाइसेमिक सेटिंग और आपकी सेहत की कार्यक्षमता

पब मेड सेंट्रल द्वारा ग्लाइसेमिक संघटन को लेकर प्रकाशित एक कम ग्लाइसेमिक स्रोतों के अनुसार खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने के साथ ही ब्लड प्रेशर और दिल की सेहत के लिए लाभ होते हैं। वहीं यदि आप अपना वजन कम करने के लिए डाइटिंग कर रहे हैं तो आपके खाने के पदार्थों के ग्लाइसेमिक जमा होने की जानकारी बहुत जरूरी है। क्योंकि हाइ ग्लाइसेमिक आहार आपके वजन बढ़ने का कारण बन सकता है।

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मधुमेह में संतरा
शरीर में ग्लूकोज बढ़ने की समस्या का मुख्य कारण होता है। चित्र : उजागर करें

यहां जानिए 8 लो ग्लाइसेमिक फूड्स के नाम (Low ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड्स)

1. संतरा (नारंगी) – जीआई 40

भरपूर मात्रा में विटामिन सी मौजूद होता है। ऐसे में मुक्त प्रणाली को बनाए रखने के लिए इसे एक बेहतरीन भोजन स्रोत के रूप में जाना जाता है। वहीं इसमें एंटीऑक्सीडेंट की भी प्रचुर मात्रा मौजूद होती है। संतरे का ग्लाइसेमिक बहुत कम होता है, ऐसे में यदि कोई व्यक्ति नींबू से पीड़ित होता है, तो उसके लिए प्राधिकरण के लाभ हो सकते हैं। इसके साथ ही संतरा एक पावरफुल एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट की तरह काम करता है।

2. (अंगूर) – जीआई 53

फाइबर और विटामिन बी6 का एक बेहतरीन स्रोत है। साथ ही इसका ग्लाइसेमिक संयोजन भी बहुत कम होता है। ऐसे में घायल के मरीज भी इसे एक सीमित मात्रा में ले सकते हैं। इसका सेवन ब्रेन फैंटेसी को संतुलित रखता है साथ ही मूड को बढ़ावा देता है।

3. ओट्स (जई) – जीआई 55

ओटमिल का ग्लाइसेमिक शॉक बहुत कम होता है, साथ ही यह फाइबर का एक बेहतरीन स्रोत है। यदि कोई व्यक्ति प्रभावित है तो इसका सेवन उसके लाभ के लिए हो सकता है।

4. ब्राउन राइस (ब्राउन राइस) – जीआई 50

यदि आप फीलिंग से पीड़ित हैं तो आपको व्हाइट राइस की जगह ब्राउन राइस का सेवन करना चाहिए। क्योंकि ब्राउन राइस का ग्लाइसेमिक संघटन काफी कम हो जाता है। वहीं इसमें कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं, जो डायसाइजेशन को धीमा कर देता है और ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोकता है। इसके साथ ही इसमें फाइबर जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो हर किसी की सेहत को बनाए रखने में मदद करते हैं।

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छाछ समर में होने वाला डिहाइड्रेशन से भी बचाए रखता है। चित्र-शटरस्टॉक.

5. छाछ (छाछ) – जीआई 35

देसी छाछ या बटरमिल्क का ग्लाइसेमिक संघटन काफी कम होता है। इसीलिए इसे पर्यटकों के लिए एक आदर्श आकर्षित के रूप में जाना जाता है। इसके साथ ही इसमें वसा और कैलोरी की मात्रा बहुत कम और अच्छी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। ऐसे में यह सेवन ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में आपकी मदद कर सकता है।

6. स्ट्रॉबेरी (स्ट्रॉबेरी) – जीआई 41

अन्य साटन की तुलना में स्ट्रोबरी में काफी कम मात्रा में चीनी मौजूद होती है साथ ही यह फाइबर से भरपूर होती है। वहीं यह ग्लाइसेमिक भी सामान्य है। इसलिए ही नहीं यह विटामिन सी का भी एक बेहतरीन स्रोत है। यदि आप लाइन से पीड़ित हैं, तो एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर स्ट्रोबरी को अपने आहार का हिस्सा बना सकते हैं। इसे आप घोषणा पत्र, आदि के रूप में ले सकते हैं।

7. अंडा (अंडा) – जीआई 0

अंडे का ग्लाइसेमिक बहुत कम होता है। इसलिए यह रक्त संचार स्तर को प्रभावित नहीं करता। वहीं अंडे का सेवन आपको लंबे समय तक एक्टिव रखता है और आपके कैलोरी इनटेक को कम कर देता है। जो ग्लाइसेमिक कंट्रोल को इंप्रूव करता है और लीन की स्थिति में लाभ हो सकता है।

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अंडे में 22% सेलेनियम, विटामिन ए, विटामिन बी जैसे कोर विटामिन होते हैं। चित्र : उजागर करें

8. राजमा (किडनी बीन्स) – जीआई 24

राजमा का ग्लाइसेमिक संघटक काफी कम होता है। इसके साथ ही यह प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है साथ ही इसमें पोटैशियम मौजूद होते हैं और प्रोटीन की बहुत कम मात्रा पाई जाती है। ऐसे में सेवन करने से आपके लाभ हो सकते हैं।

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Saurabh Namdev

| PR Creative & Writer | Ex. Technical Consultant Govt of CG | Influencer | Web developer
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