
रुद्रप्रयाग समाचार: विश्व विख्यात केदारनाथ धाम (केदारनाथ धाम) की यात्रा में इस बार प्रशासन एक नई पहल कर रहा है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर चलने वाले घोड़े-खच्चरों की संख्या इस बार पहले से निर्धारित की जा रही है। पैदल मार्ग पर इस बार केवल पांच हजार घोड़े-खच्चर ही संचालित होंगे और ये पांच हजार घोड़े-खच्चर रुद्रप्रयाग जनपद के स्थानीय लोग ही होंगे। यदि बाहर से घोड़े खच्चर आते हैं तो उन्हें पैदल यात्रा मार्ग पर संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यदि यहां के घोड़े-खच्चरों की संख्या पांच हजार से कम होती है तो बाहरी घोड़े-खच्चरों का संचालन किया जाएगा। विश्व विख्यात केदारनाथ यात्रा के सफल संचालन में सबसे अधिक परेशानी घोड़े-खच्चर करते हैं। एक ही पैदल रास्ता होने से जहाँ पैदल चलने वाले यात्रियों को घोड़े-खच्चरों के कारण परेशानी होती है, वहीं घोड़े-खच्चरों की लीड के कारण पैदल मार्ग पर जगह-जगह गंदगी की भरमार भी हो जाती है। कई बार यात्रा पर पैदल चलने वाले यात्री पर घोड़े-खच्चरों का झटका लग जाने के कारण गिरने से यात्रियों की मौत भी हो जाती है।
पांच हजार घोड़े-खच्चरों का ही किया पंजीकरण
घोड़े-खच्चरों से होने वाली हड़बड़ी को कम करने के लिए इस बार प्रशासन घोड़े-खच्चरों की सीमित संख्या में रहना है। पिछले दौरे के सीजन में जहां आठ हजार घोड़ों-खच्चरों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। वहीं इस बार केवल पांच हजार घोड़े-खच्चरों का ही पंजीकरण होगा। इन पांच हजार घोड़ों के संचालन में सबसे पहली प्राथमिकता रुद्रप्रयाग के लोगों को दी जाएगी। यदि यहां पांच हजार घोड़े-खच्चर हो जाते हैं तो अन्य घायल या प्रदेशों के घोड़े-खच्चरों का ऑपरेशन केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर नहीं होगा।
पैदल मार्ग यात्रा पर घोड़े-खच्चरों का परिचालन सीमित संख्या में होने से जहाँ घोड़े-खच्चरों की बाधाएँ होंगी, वहीं पैदल मार्ग पर गंदगी की भरमार भी नहीं होगी और पैदल चलने वाले यात्रियों की परेशानी भी कुछ हद तक दूर होंगी। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मूर दीक्षित ने बताया कि इस बार सीमित संख्या में पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का संचालन होगा। घोड़े-खच्चरों के संचालन में पहली प्राथमिकता जिले के लोगों को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि घोड़े-खच्चरों का परिचालन सीमित संख्या में होने से पैदल मार्ग पर गंदगी कम हो जाएगी, साथ ही पैदल चलने वाले यात्रियों को भी परेशानी नहीं होगी।
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