
विस्तृत समीक्षा ‘बेन स्टोक्स: फीनिक्स फ्रॉम द एशेज’: कहा जाता है कि यदि आप अपने शारीरिक रूप से स्वस्थ रोगी, रोज़ाना बेवकूफ, कोई खेल नहीं खेलेंगे और लोगों से जुड़े रहेंगे तो आपको अवसाद होने की स्थिति नहीं के बराबर है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई खिलाड़ियों ने ये बताया है कि मानसिक स्वास्थ्य का खेल से कोई संबंध नहीं है। भारत में मानसिक स्वास्थ्य को अभी भी अस्वास्थ्यकर आहार नहीं दिया जाता है। साल 2014 में भारत की क्रिकेट टीम इंग्लैंड गई थी। रिवायत विराट कोहली को ये बात बहुत बुरी तरह याद है. बिजनेस से बाहर जाने वाली हर बॉल, विराट कोहली का विकेट ले उड़ती थी। पूरे दौरे में बहुत बुरी तरह फ्लॉप रहे।
क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए इंग्लैंड में अच्छा खेलना है। विराट इस यात्रा के बाद समुद्रतटीय संरचनाओं के खंडहर में थे। ना होने वो अपना लाइसेंस ठीक कर पाए और उन्हें अपने खिलाड़ी होने पर भी शक लगा। एक प्रतिभावान खिलाड़ी को नजर नहीं लगती। पिछले कुछ प्राचीन काल में विराट पुनः आरंभ अपनी मानसिक स्थिति से शुरू कर रहे हैं। कारण कुछ भी हो लेकिन विराट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सेंचुरी अलॉटमेंट में करीब 3 साल लग गए हैं। टी 20, वन डे और टेस्ट क्रिकेट में विराट की बैटिंग एवरेज, बड़े बड़े धुरंधरों का नहीं होता।
विराट तीर्थयात्रियों में भारत के सफलतम कप्तान गिने जाते हैं। राजनीति की ऐसी चाल चली गई कि हमारी पहली टी 20 और फिर वन डे की मेडिसिन ले ली गई। टेस्ट की वैज्ञानिक से वे खुद दूर चले गए। राजनीति का असर उनके खेल पर पड़ा। 2022 अगस्त महीने में ग्राहक वे अपना फॉर्म वापस पा सके थे। शतक अब भी दूर है. 70 अंतर्राष्ट्रीय दिग्गजों के बाद विराट का बल्ला शतक लग गया। उनकी प्रतिभा, उनका परिश्रम, उनका भूखा रहना, उनकी तैयारी या उनकी मानसिक शक्ति नहीं बल्कि मानसिक शक्ति का जो उनके साथ हुआ वह सिर्फ उनकी नींद को दर्शाता है।
विराट की प्रिय गिल से विट जुलता नाम रखें वाले इंग्लैंड के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर बेन स्टोक्स की जिंदगी के संकटों से लड़ते-लड़ते बनी मानसिक स्थिति को अंतिम रूप देने वाली डॉक्यूमेंट्री “बेन स्टोक्स: फिनिक्स फ्रॉम द एशेज” हाल ही में अमेज़न प्राइम वीडियो पर जारी हुई है. सच की बात करें तो इस डॉक्युमेंट्री को जरूर देखें। मन के माने जीत का ऐसा है जीवट बेन स्टोक्स की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा।
इंग्लैंड के क्रिकेटर बेन स्टोक्स आज क्रिकेट की दुनिया का ऐसा नाम है, जो मैदान पर आकर ही विरोधी टीम के दिल में रोमांच पैदा करता है और दर्शकों के मन में रोमांच पैदा कर देता है। न्यूज़ीलैंड में सामामी बेन के पिता रग्बी टीम के कोच थे और माँ ब्रिटिश थीं। 12 साल के बेन इंग्लैंड गए जब उनके पिता इंग्लैंड में रग्बी टीम के कोच बनने का मौका मिला। कॉकरमाउथ जैसे एक छोटे से शहर में बेन ने क्रिकेट सीखना और खेलना शुरू किया। बेन की प्रतिभा ने उन्हें जल्द ही स्कूल क्रिकेट से लेकर क्लब क्रिकेट और फिर जल्द ही इंग्लैंड के नेशनल क्रिकेट में जगह मिल गई।
क्रिकेट लीग में प्रतिस्पर्धा बेन का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाम हो गया। 2017 में बेन को इंग्लैंड का उप कप्तान बनाया गया और उसी दिन बेन के दोस्त जो रूट को इंग्लैंड का कप्तान बनाया गया। बेन ने इंग्लैंड की टीम से अपनी बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग में नई पकड़ बनाई। छोटे से शहर से आया बेन एक दिन का संप्रदाय का शिकार हो गया।
सितंबर 2017 में इंग्लैंड के सिटी ब्रिस्टल में एक नाइट क्लब के बाहर कुछ लोगों ने बेन के दो दोस्तों पर ताने की लड़ाई शुरू की जो जल्द ही क्लास में बदल गई। बेन ने भी शराब पी रखी थी लेकिन अपने दोस्तों की बेइज्जती और ज़ीराज से बेन का ख़ून खोल उठा। उसने उन वैज्ञानिकों को धक्का दिया, मेडल बढ़ा दिया और बेन ने एक लड़के को घुमासा मार दिया। पुलिस आ गयी, बेन गिरफ्तार हो गया और ये केस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। बेन क्रिकेट से दूर कर दिए गए। कई महीनों तक बेन इंग्लैंड की टीम से बाहर रहे। केस का फैसला जब आया और बेन बरी भी हो गया लेकिन बेन के दिमाग पर इस पूरी घटना का बहुत बुरा असर पड़ा।
मीडिया ट्रायल की वजह से बेन और उनके परिवार को बहुत कुछ झेलना पड़ा और बेन को क्रिकेट से नफरत हो गई। स्टुअर्ट ब्रॉड या जो रूट जैसे बेन के दोस्तों ने उन्हें बहुत एकजुट किया। क्रिकेट से हुई नफरत के बावजूद बेन ने आपके लिए फिर से अपने आप को धोखा दिया और इंग्लैंड क्रिकेट को उनकी अहमियत साबित करने के लिए उन्हें फिर से इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। की. 2019 में इंग्लैंड को क्रिकेट वर्ल्ड कप जिताने वाली टीम में बेन सबसे बड़े हीरो बनकर उभरे। बेन इसके बाद सफलता की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे थे कि उनकी जिंदगी में उन्हें एक और झटका दिया गया।
बेन के पिता को अचानक पता चला कि उन्हें कैंसर है और उनके बीच की उंगली कटनी में पड़ गई थी। कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो अमूमन ठीक नहीं होती। धीरे-धीरे कैंसर फिर फैला और बेन की रोशनी में फिर से उधेड़न को तैयार खड़ा था। दिसंबर 2020 में बेन के पिता की मृत्यु हो गई। बेन अपने पिता की देखभाल के लिए एक महीने के लिए अपने माता-पिता के पास न्यूज़ीलैंड शिफ्ट हो गए थे। बेन को बचपन से क्रिकेट का चैंपियन बनाने वाले उनके पिता का साया उनके सर पर नहीं रहने से बेन को बहुत गहरा सदमा पहुंचा दिया।
बेन को 2021 में इंग्लैंड की क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया क्योंकि लगभग पूरी टीम के सदस्य कोविड के शिकार हो गए थे। वैकेंसी के कुछ महीने बाद ही उन्होंने अपने मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से परेशान हो गए। उन्हें पैनिक अटैक लगे, वो आप अपने आने वाले पुराने लगे, बिना बात के गुस्सा लागे, चिड़चिड़े हो गए। बेन ने कहा कि जब आप क्रिकेट खेलने जाते हैं, अपने होटल के कमरे में अकेले रहते हैं तो आपको पता चलता है कि आपके साथ आपका कोई नहीं है। आप अकेले हैं. ये अकेलापन बेन को सालने लगा और जुलाई 2021 से बेन ने क्रिकेट से लंबी छुट्टी का ऐलान कर दिया।
बेन स्टार्कला: फीनिक्स फ्रॉम द एशेज डॉक्युमेंट्री में सैम मेंडेस द्वारा लिया गया बेन स्टारकास्ट का ट्रेलर बड़ी प्रमुखता से लिया गया है। बेन के पास सब कुछ है, प्रतिभा है, खेल है, प्रेरणा है, क्रिकेट और क्रेडिट से मिलने वाला भरकम पैसा है, परिवार भी है लेकिन ये सब अपना अकेलापन दूर नहीं कर पा रहे हैं। बेन क्रिकेट खेल वापस आये हैं। बेन फिर से ग्राउंडग्राउंड पर ऑपरेट करने लगे लेकिन बेन अकेलेपन में अब अपने परिवारवाले और उनके दोस्त से भी दूर नहीं जा रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसी समस्या है जो भारत में बिल्कुल भी भिन्न नहीं है।
हम कभी ये को तैयार ही नहीं करते कि जीवन की उत्पति, आसपास का परिवेश, जाने-माने लोगों का आपके प्रति आशय, और कई सारी बातें जो आपकी सोच पर प्रभाव डालती हैं और कई बार ये प्रभाव आपके हित के लिए नहीं होता . शेर बच्चा शेर बच्चा, लड़का होके रोता क्यों है, तुम्हें लड़की होके चाहिए, लड़का तो ऐसे ही होते हैं जैसे जुमलों की वजह से हम कभी सच में स्वीकार नहीं करते। मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर समस्या है. बेन स्टाकोला: फीनिक्स फ्रॉम द एशेज़ की डॉक्यूमेंट्री देख कर ये निकोलस और आसान हो जाता है। इसके कई खिलाड़ी इसकी चपेट में आ चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर ग्लेन मैक्सवेल, जापान के फुटबॉल खिलाड़ी नाओमी ओसाका की मानसिक जांच से हम सब दाख़िले हैं। जो लोग कहते हैं कि हर दिल से नहीं, उन्हें ये बात डॉक्युमेंट्री देख कर समझ आ जाती है कि बात दिल की है नहीं, दिमाग की है।
विस्तृत रेटिंग
कहानी | : | |
स्क्रिनप्ल | : | |
डायरेक्शन | : | |
संगीत | : |
.
टैग: बेन स्टोक्स, छवि समीक्षा
पहले प्रकाशित : 07 सितंबर, 2022, 18:46 IST



- लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- विडियो ख़बरें देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
- डार्क सीक्रेट्स की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- UNA विश्लेषण की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें