
रायपुर। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भारी और स्पष्ट बहुमत से मिली जीत ने कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम किया है। साल 2018 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में चुनाव हुआ था, जहां गठजोड़ की सरकार बनी थी। कर्नाटक चुनाव के बाद प्रदेश का माहौल बदला और अब तक के सबसे बड़े बहुमत की कांग्रेस बनी सरकार। प्रदेश में छह महीने बाद चुनाव होना है और कर्नाटक में कांग्रेस की स्पष्ट बहुमत की सरकार बनी है।
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार ने जनता से किए 36 वादों में से 90 प्रतिशत वादों को पूरा किया है। इसके अलावा, कई जनकल्याणवादी योजनाओं में राज्य के हर वर्ग के साथ न्याय किया गया है और एक धारणा नीची है। कर्नाटक की जनता भी ऐसी ही सरकार कर्नाटक में चाहती थी, इसलिए कांग्रेस को तारीख है। अब कांग्रेस इस जीत को भाजपा की नकारात्मक राजनीति की हार और धर्म के आधार पर विभाजन की राजनीति को खारिज करने वाला मान रही है।
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कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 3500 किलोमीटर की पदयात्रा करके एकता, भाईचारे का संदेश दिया और जनता की वास्तविक चिंताओं, नौकरी को चुनाव में उठाया। प्रदेश में भी इन जुड़े मुद्दों को लेकर आगे बढ़ा। विधानसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा की सांप्रदायिकता एजेंडे और जनता के वास्तविक मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जीत लोकतंत्र की जीत एक सूत्र में आ रही है। प्रदेश की 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 71 विधायक हैं और 11 सदस्यीय लोकसभा में केवल दो सांसद हैं। मरकाम ने कहा कि इस बार विधानसभा के साथ-साथ लोकसभा चुनाव में भी जनता कांग्रेस को पसंद करेगी।
कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि कर्नाटक में जिस तरह से भाजपा ने बजरंगबली के नाम का दुरूपयोग किया, उसी तरह प्रदेश की राजनीति को भी नुकसान पहुंचाने का काम कर रही है। कर्नाटक में कांग्रेस की जीत डबल इंजन का नारा लगाने वालों पर करारा चोट है। भाजपा ने केंद्र सरकार के काम के नाम पर वोट मांगा, लेकिन दोनों ही मुस्लिम भाजपा के पक्ष में नहीं गए।



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