
राजस्थान समाचार: जयपुर बम ब्लास्ट मामले में चारों फाइलों को बुरी तरह जाने के बाद बीजेपी ने अशोक गहलोत पर हमला बोला है. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने जयपुर बम विस्फोट मामले में बयान जारी कर कहा कि 13 मई 2008 को शहर में काम कर रहे जयपुर में बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 71 लोग मारे गए थे। कालचक्र दिसंबर 2019 में इनमें से एक हफ्ते को फांसी की और तीन फाइलों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। आज (29 मार्च) राजस्थान हाई कोर्ट ने उन सभी तस्वीरों को पूरी तरह से खत्म कर दिया। इतने बड़े संज्ञेय अपराध में उन सबका बहुत होना, यह राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की पैरवी पर शंका पैदा करता है।
ए पर तर्क प्रश्न
पूर्व बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि किस तरह से एजेसियों से छांटकर सबूत सामने आते हैं और कोर्ट ने किस तरह से कहा कि ठीक तरीके से पैरवी नहीं हुई इसकी जांच पर शंका पैदा करता है। ऐसे में इस तरह के संगीन मामले में राज्य सरकार का विवाद का संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा “मुझे लगता है कि यह भी कांग्रेस सरकार की तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है”।
क्या है मामला ?
जयपुर में 13 मई 2008 को सीरियल ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 71 लोगों की मौत हो गई थी। इसे लेकर एक लंबी लड़ाई चल रही थी, जिसमें राजस्थान हाई कोर्ट ने इस विस्फोट से जुड़े सभी 4 दोषियों को बड़ी राहत दी है। उच्च न्यायालय ने सभी को बरबाद कर दिया। साल 2008 में माणक चौक खंडा, चांदपोल गेट, बड़ा चौपड़, छोटा चौपड़, त्रिपोलिया गेट, जौहरी बाजार और सांगानेरी गेट पर एक के बाद एक बम धमाकों से जयपुर दहल गया था। देर रात हुए इन बम धमाकों में 71 लोग मारे गए और 185 लोग घायल हो गए। राम चंद्र मंदिर के पास से एक जिंदा बम बरामद किया गया था, जिसे बम निरोधक दस्ते ने निष्क्रिय कर दिया था। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद एक बार मौहल को फिर से अलग कर दिया गया।
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