
झारखंड समाचार: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (बाबूलाल मरांडी) इन दिनों मुख्यमंत्री सुशील सोरेन (हेमंत सोरेन) पर खूब हमले बोल रहे हैं। हाल ही में मरांडी ने सीएम सोरेन के अपोजिट को लेकर तीखा प्रहार किया था। अब बाबूलाल मरांडी ने सोरेन पर परिवारवाद को लेकर हमला बोला है। मरांडी के अनुसार सोरेन परिवारवाद का सीधा उदाहरण है। मरांडी की माने तो सोरेन अवशेष, अल्पज्ञानी एवं सोने का टुकड़ा लेकर पैदा हुए व्यक्ति थे जिन्हे गद्दी बहुत आसानी से मिल गई।
परिवारवाद के समर्थक हैं समर्थक- और शिबू सोरेन
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने परिवारवाद पर हमला करते हुए कहा कि, कभी-कभी सोचता हूं कि परिवारवाद ने अपने योग्य, अनुभवी और संघर्षशील नेताओं को आगे बढ़ाया तो तस्वीरें अलग-अलग हुईं। जैसे यूपी में धनुर्धर सिंह ने, बिहार में लालू यादव ने और झारखंड में शिबू सोरेन ने अपने किसी दूसरे अनुभवी, जुझारू दोस्त को गद्दी दी या उन्हें आगे बढ़ाया तो राज्य का कुछ अच्छा हो गया।
एलेवलिन सोरेन को रेनॉल्ट, बही, अल्पज्ञनी कहा जाता है
उन्होंने आगे कहा कि, झारखंड के संदर्भ में मेरा मानना है कि श्री स्टीफन मरांडी जी, विकलांग साइमन मरांडी, लोबिन हेम्ब्रम जैसे कई अनुभवी आंदोलनकारी जमीन से जुड़े नेता थे, जो शिबू जी के मित्र थे लेकिन जब गद्दी की बात आई तो वे किनारे हो गए अपने कुलीन, अल्पज्ञानी एवं सोने का टुकड़ा लेकर जन्मे नाल्याक पुत्रों ने पहलवानों को नेतृत्व थमा दिया। नतीजे सामने हैं. परिवारवादी दल लोकतंत्र पर कलंक हैं. वाइटना जरूरी है, अगले चुनाव में जनजातीय परिवार बाहर हो जायेंगे।
सीएम सोरेन अपने ऊपर लगे बैकपैक पर चुप क्यों?
इससे पहले बीजेपी नेताओं ने ट्वीट करते हुए कहा था कि, ‘लोग कहते हैं कि रसेल सोरेन जी अपने ऊपर लगे सहयोगियों को लेकर चुप हो जाते हैं। तले हुए हैं, लेकिन कुछ टुकड़े नहीं। मैं सोचता हूं कि वो बोलेंगे भी तो क्या? उनके पारिवारिक मित्र अमित जेल में हैं, उनके प्रतिनिधि और संताल के सुपर सीएम पंकज जेल में हैं, उनका एक शा गिरह (महालाल) प्रेम जेल में है, अभी भी कई राजदार उदहारण के स्मारक पर हैं जो जेल की अपनी बारी के इंतजार में आधे रह रहे हैं हैं.’



- लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- विडियो ख़बरें देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
- डार्क सीक्रेट्स की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- UNA विश्लेषण की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें