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योगी सरकार में एटीएस की ताबड़ तोड़ कार्रवाई तोड़ी अंतरराष्ट्रीय संगठन की कमर, राजनीतिक दबाव से मुक्त हुआ स्क्वॉड

योगी सरकार ने संकेतों को तकनीक, अस्त्र-शस्त्र, साइबर जानकार, आधुनिक सॉफ्टवेयर, संबद्ध, विश्व स्तरीय प्रशिक्षण, दस्तावेज, मॉक एवं ड्रिल्स, आधुनिक सॉफ्टवेयर, डिजिटल फोरेंसिक, वीडियो फोरेंसिक, बिग डेटा एनालिसिस से युक्त प्रभावी कार्रवाई को अमल में लाते हैं। आने का काम किया है।

उत्तर प्रदेश में एक दौर था जब पाक परस्त संगठन प्रदेश के शहरों में बम विस्फोट करके पूरे देश को दहला रहे थे। और और तो और प्रदेश ने ऐसी फेसबुक पेज को भी देखा है जब नियुक्ति पर लगे मुकदमों को केवल वोट बैंक को खुश करने के लिए वापस ले लिया गया था। मगर आज उत्तर प्रदेश की तरह आतंकवाद का खौफ से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। कभी आतंक की नर्सरी के नाम से कुख्यात रहा प्रदेश कामगढ़ जिला आज प्रदेश के विकास के सफर में कदम से कदम मिला कर चल रहा है। यूपी पिछले छह साल से शांत है तो इसके पीछे प्रदेश की एजेंसियां ​​(एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) की अहम भूमिका है। सेंट्रल सीलसेट के साथ बेहतर तालमेल, इन्फ्रास्ट्रक्चर का नवीनीकरण, गाजियाबाद, लखनऊ और अयोध्या में स्पॉट (SPOT) का गठन करते हुए ऑप्स 11 फील्ड यूनिट व 18 टीम की स्थापना ने प्रदेश में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक स्तर पर प्राधिकरण प्रदान किया है। आज आतंकवाद और उग्रवाद के दंश से मुक्त प्रदेश टूट गया है।

6 साल में मजबूत हुआ सुरक्षा चक्र

6 साल पहले प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद योगी सरकार ने एक प्राधिकरण को तकनीक, अस्त्र-शस्त्र, साइबर विशेषज्ञ, आधुनिक सॉफ्टवेयर, विश्व स्तरीय प्रशिक्षण, उपकरण, मॉक एवं अभ्यास, आधुनिक सॉफ्टवेयर, डिजिटल फोरेंसिक, वीडियो फोरेंसिक, बिग डेटा इमेजिंग प्रभावी कार्रवाई करने से अमल में आने का काम किया है। यदि पिछले केवल एक वर्ष में आंकड़े दर्ज होते हैं तो एजेज ने पुरस्कार घोषित कर दिया है और 10 नामांकनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा आईएसआईएस, जैश ए मोहम्मद, अल-कायदा, आईएसआई और अन्य नियामक संस्थाओं से जुड़े 21 लोगों को एटीज ने धर-दबोचने में निश्चित हासिल किया है। वहीं PFI, रोहिंग्या, बांग्लादेशी और उग्रवादी संगठन से जुड़े 13 लोगों को आतंकवाद विरोधी दस्ते ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। साथ ही जाली करेंसी के खिलाफ भी योगी सरकार में प्रभावी कारवाई हुई हैं। इस धंधे से जुड़े लोगों की धरपकड़ लगातार जारी है। अवैध सिम बॉक्स का संचालन करने वाले 11 लोगों को एक साल के अंदर यूपी एटीजी की टीम ने गिरफ्तार किया है। ऐसे ही अवैध हथियार असुरक्षित 15 लोगों को एजेसियों ने गिरफ्तार किया है। साथ ही अन्य देशों में कार्रवाई की गिरफ्तारी में भी योगी सरकार प्रभावी कदम उठाए।

यू.पी

कौन भूल गया है सदी के पहले दशक में यूपी में एक के बाद एक होते हुए धमाकों ने ना सिर्फ आम जनता को आत्माविष्कृत कर रखा था, बल्कि कई बार सत्ता पक्ष की ओर से संगठन को मिलने वाली मौन सहमति ने उन्हें प्रदेश में फलने- फूलने का पूरा मौका भी दिया। एक के बाद एक मलबे बम धमाकों ने सैकड़ों लोगों को धार्मिक उन्मादियों का कट्टरता का शिकार बनाया। वाराणसी रेलवे स्टेशन और संकटमोचन मंदिर का सीरियल बम धमाका हो या लखनऊ, फैजाबाद और बनारस कचहरी में हुआ विस्फोट, इन धमाकों को याद करके आज भी प्रत्यक्षदर्शियों की आंखें साफ दिखती हैं। जौनपुर में हुए श्रम एक्सप्रेस जीवित विस्फोट की तरह विस्फोट से ना सिर्फ जनहानि हुई बल्कि 2010 में वाराणसी के शीतला घाट बम ने भारतीयों की पवित्र नगरी नहीं देश के मनोबल को तोड़ने का भी काम किया था। हालांकि सत्ता परिवर्तन के साथ ही मोदी-योगी शासन के बीते 9 साल में देश में अमन की बहाली हुई और यूपी पूरी तरह से झटके से मुक्त हुआ। इसके पीछे आतंक-विरोधी को वोट बनाने की रणनीति ने अहम योगदान दिया। आतंकवाद विरोधी योजनाओं को राजनीति से अलग करते हुए और वोट बैंक का लाभ-हानि से ऊपर उठकर नए प्रयास का ही परिणाम रहा है कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश से आतंक का समूल विनाश हो गया है।

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Saurabh Namdev

| PR Creative & Writer | Ex. Technical Consultant Govt of CG | Influencer | Web developer
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