
आजकल जंक फूड, बिस्कुट, आशंकाएं, डिकंप्रेस्ड और अन्य पैकेज्ड फूड को बनाने में मैदा को मेन इनग्रेड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या ये हमारी सेहत के लिए उचित हैं? आप बताएं कि मैदा आंतों में चिपक जाती है, जिसके कारण चाहे आप कितना भी हेल्दी भोजन करें उनके पोषक तत्व शरीर में अवशोषित नहीं हो पाते हैं। वहीं मैदे को फ्लशआउट करने में पाचन क्रिया को पूरा करने का समय लगता है तब तक शरीर को कई नुकसान हो जाते हैं। इसलिए आमतौर पर हमें परेशान करने की जगह का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
हेल्थ शॉट्स ने इस विषय पर न्यूट्रीफाई बाई पूनम डाइट एंड वैलनेस क्लिनिक एंड अकादमी के डायरेक्टर पूनम दुनेजा से सलाह ली। वे मैदा खाने के कुछ हिस्सों पर बात करते हैं जिससे पूरी तरह से परहेज करने की सलाह दी जाती है। तो अजीज जानते हैं मैदा खाना सेहत के लिए किस तरह से खतरनाक हो सकते हैं (मैदा के दुष्प्रभाव)।
यहां जानिए आखिर क्यों मैड की जगह भ्रम का भ्रम
1. ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है
मैदे का ग्लाइसेमिक अधिक होता है, ऐसे में जब आप मैदे से बने किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं तो शरीर में अधिक मात्रा में शुगर रिलीज होती है, जो सीधे आपके रक्त वरीयता में प्रवेश करता है और ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है है। विशेष रूप से यदि आप लाइन से पीड़ित हैं तो आपको मैदे से पूरी तरह से परहेज रखना चाहिए। वहीं नियमित रूप से मैदा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन एक आम व्यक्ति में लिनेन के खतरे को बढ़ा देता है।
2. वजन बढ़ने का कारण बनता है
लगभग आपके सभी पसंदीदा जंक फूड्स को बनाने में उपयोग किया जाता है, जो आपके शरीर के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है। मैदा मेटाबॉलिक रेट को प्रभावित करता है, जब आप नियमित रूप से मैदे का सेवन करते हैं तो मेटाबॉलिज्म से प्रभावित होने की वजह से बॉडी बॉडी बर्न करना बंद कर देता है और बॉडी वेट जेन करने लगती है। जिसकी वजह से मोटापे और घबराहट का सामना करना पड़ सकता है।
3. पाचन क्रिया पर निर्भर नकारात्मक प्रभाव
मैदे में भरपूर मात्रा में कार्बंज मौजूद होते हैं जो पाचन क्रिया के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है। एक स्वस्थ पाचन क्रिया के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है और इसमें फाइबर नहीं होता है।
जब आप मैदे का सेवन करती हैं, तो यह आपके आंटों से चिपक जाता है और इसे छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है, जिसकी वजह से गुड बैक्टीरिया का दावा धीमा हो जाता है और गट इन्फ्लेमेशन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा मैदे की जगह भ्रम का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
यह भी पढ़ें : हेल्दी हार्ट के लिए इन 5 फूड कॉम्बिनेशन को बनाएं अपने आहार का हिस्सा, कॉन्ट्रेल कोलेस्ट्रॉल लेवल रहेगा
4. हड्डियां कमजोर हो जाती हैं
मैदा एसिडिक प्रवृत्ति का होता है ऐसे में अत्यधिक मात्रा में मैदे के सेवन से बोन डेंसिटी कम होने लगती है। मैदे में मौजूद एसिड हड्डियों से जुड़ी समस्या जैसे कि अर्थराइटिस और सूजन के कारण बन सकते हैं।
5. कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देता है
जानकारों के अनुसार यदि आप नियमित रूप से मैदे से युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं, तो यह आपके शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है। कोलेस्ट्रोल का बढ़ता स्तर स्वास्थ्य संबंधी कई कारणों से बनता है। विशेष रूप से यह रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध कर देता है जिसके कारण कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

6. संतुष्टि महसूस नहीं होती
मैदे से युक्त पदार्थों के सेवन से आपको बार-बार भूख लगने की समस्या होती है। चुकंदर की क्रेविंग बढ़ जाती है और आप अधिक मात्रा में जंक फूड चौपट हो जाते हैं, जिससे कैलोरी इंटेक भी बढ़ जाता है। ओवरईटिंग और जरूरत से ज्यादा खाने से संपूर्ण लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है। इनमें से आम आम हैं, ओबेसिटी, हाई ब्लड प्रेशर। साथ ही साथ यह त्वचा एवं देखने वालों पर भी बुरा असर डालता है।
यह भी पढ़ें : वजन कम करने के लिए लौकी : वजन कम करने के दौरान डाइट में शामिल करें 5 मिनट में तैयार होने वाली ये सब्जी



- लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- विडियो ख़बरें देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
- डार्क सीक्रेट्स की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
- UNA विश्लेषण की ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें