
आयुर्वेद प्राचीन भारतीय औषधीय प्रणाली है। आयुर्वेद में तीन दोष-वात, पित्त और कफ मुख्य रूप से काम करते हैं। यह उपचार समग्र शरीर पर प्रभाव डालता है। यह केवल बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि शरीर को सुरक्षा भी प्रदान करता है। आयुर्वेदशास्त्रियों के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति के अपने-अपने दोष होते हैं, जिन पर हर्ब काम करते हैं। सेवन में 5 शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ अवश्य शामिल करनी चाहिए। इससे कई बूढ़ों से मुक्ति मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है।
संक्रमण से बचाती हैं आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ
आयुर्वेदाचार्य डॉ. विनीत भट्ट कहते हैं, ‘आयुर्वेदिक हर्बल आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली का एक सिद्धांत है। इन उपचारों में – मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना (मानसिक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ), प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना (प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ), स्वस्थ त्वचा (स्वस्थ त्वचा के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ), बाल (आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ) बालों और सिर की त्वचा के लिए) का उपयोग किया जाता है।
यहां 5 शक्तिशाली जड़ी-बूटियां शामिल हैं जिनमें शामिल सामान शामिल होना चाहिए
1 अश्वगंधा (अश्वगंधा)
अश्वगंधा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए किया जाता है। इसे इंडियन जिन्सेंग (इंडियन जिनसेंग) या विंटर चेरी (विंटर चेरी) भी कहा जाता है। यह यौन स्वास्थ्य और तंत्रिका तंत्र को पोषण स्तर की गारंटी देता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। यह तनाव कम कर शरीर को शांत करता है। नींद की खोज में सुधार कर यादगार संपत्ति की प्राप्ति होती है। वजन नियंत्रित कर हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है।
कैसे करें प्रयोग
अश्वगंधा का सेवन पाउडर, टैबलेट या आर्क के रूप में किया जा सकता है। इसे भोजन के साथ या भोजन के पहले किसी भी समय लिया जा सकता है।
2: ब्राह्मी (ब्राह्मी)
तंत्रिका संबंधी विकारों के इलाज के लिए ब्राह्मी का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। याददाश्त, एकाग्रता और बुद्धि की प्राप्ति होती है। तनाव और अवसाद को कम कर मन को शांत करता है। यह तंत्रिका तंत्र की निष्क्रियता में सुधार करता है। यह ब्रेन के लिए टॉनिक का काम करता है। ब्लड प्यूरीफ़ायर के रूप में कार्य करता है। यह त्वचा और बालों के लिए भी बहुत बढ़िया है।
कैसे करें प्रयोग
घी या शहद के साथ इसकी कुल मात्रा काफी कम होती है। इसका स्टॉक स्टॉक भी लिया जाता है। दूध के साथ दूध का सेवन पहले या बाद में किया जा सकता है।
3: शतावरी (शतावरी)
शतावरी को जड़ी-बूटी की रानी (हर्ब क्वीन) भी कहा जाता है। इसमें सैपोनिन मौजूद होता है। इसके कारण एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह रोग संरचना क्षमता को बढ़ाता है और महिला जनरेटिंग सिस्टम के लिए अद्भुत होता है। यह रोग प्रतिरोधक शक्ति प्राप्त करता है। सूजन को कम करने के लिए जनरेटिंग सिस्टम की जानकारी में सुधार किया जाता है। पाचन तंत्र के लिए यह अद्भुत है। सांसरिक परमाणु अलैहिस्सलाम का काम करने में प्रभावशाली है। रक्त शर्करा मानक नियंत्रित करता है। शंक एजिंग की शुरूआत है।

कैसे करें प्रयोग
शतावरी पाउडर को पानी, दूध या किसी अन्य पदार्थ के साथ मिलाकर लिया जा सकता है। इसे लॉजिस्टिक में भी बनाया जा सकता है। शतावरी की गोली खाली पेट या भोजन के एक घंटे पहले ली जा सकती है।
4 नीम (नीम)
नीम का उपयोग विभिन्न बर्तनों के लिए किया जाता है। आयुर्वेद के लगभग 75% फॉर्मूलेशन का उपयोग किया जाता है। नीम में एंटीसेप्टिक, एंटी-माइक्रोबियल और एंटीफंगल गुण होते हैं। रक्त को शुद्ध करने वाला है। यह शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालता है। यह पिम्पल, एक्जिमा और त्वचा रोगों का इलाज करता है। ओरल हेल्थ, हेयर केयर के लिए नीम शानदार हैं।

कैसे करें प्रयोग
खाली पेट नीम की 4-5 दोस्त लें। नीम की रेस्टॉरेंट के लिए बदसूरत स्वाद कम करने के लिए आप हांगकांग में एक साथ मिल सकते हैं। पानी में नीम की नाव को खाली पेट पिया जा सकता है। नीम की नाख़ून के पेस्ट को बाल और स्कर्ट का उपयोग किया जा सकता है।।
5 मंजिष्ठा (मंजिष्ठा)
मंजिष्ठा बेहतरीन ब्लड और डॉक्टर रिसर्च है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर कार्य करती है। यह सर्जरी, किडनी और त्वचा को साफ करने के लिए प्रभावशाली है। इससे पिंपल, एलर्जी ख़त्म हो जाती है। याददाश्त और सीख की क्षमता है।।

कैसे करें प्रयोग
दोपहर और रात का खाना खाने के बाद शहद या पानी के साथ आधा चम्मच मंजिस्ता चिप्स लिया जा सकता है। खाने के बाद मंजिस्ता कैप्सूल भी लिया जा सकता है।
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