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इंडोनेशिया में अधिकार के कारण 21 लोगों की मौत, कई अब भी लापता

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मूसलाधार बारिश के बाद खुले में दबने से 30 मकान मलबे में दब गए। बयानों के मुताबिक अधिकारियों ने तलाश एवं बचाव एजेंसी, पुलिस और सेना के 200 से अधिक प्रवासियों को 33 लोगों की तलाश के लिए रोक रखा है, जो अब भी लापता हैं।

जकार्ता। इंडोनेशिया के सुदूर नटुना द्वीप में भीषण चढ़ाई के बाद डूबने से बचने के लिए और शव बरामद करने के बाद, इस प्राकृतिक आपदा में जान जाने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। राष्ट्रीय आपदा रोकथाम एजेंसी ने एक आरोप में कहा है कि दक्षिण चीन सागर के किनारे नटुना क्षेत्र में एक दूरस्थ द्वीप पर जेंटिंग और पंगकलां वनों में अन्वेषण अभियान चलाया जा रहा है। वहां मूसलाधार बारिश के बाद छत पर चढ़कर 30 मकान मलबे में दब गए। बयानों के मुताबिक अधिकारियों ने तलाश एवं बचाव एजेंसी, पुलिस और सेना के 200 से अधिक प्रवासियों को 33 लोगों की तलाश के लिए रोक रखा है, जो अब भी लापता हैं।

उनकी वास्तविकता में दबे मकानों में बूबी होने की आशंका है। राष्ट्रीय आपदा निवारण एजेंसी के प्रमुख सुहरयांतो ने जुपिटरवार को बताया कि आठ लोगों को ज्वलनशील विस्फोट से निकाला गया, जिनमें से तीन की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अलर्ट पर तेज बारिश होने के कारण बचाव अभियान प्रभावित हो रहा है। सुहरयांतो ने कहा, ”हम लापता लोगों का पता लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि स्वान दस्ते का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। बुधवार को जकार्ता और आसपास के द्वीपों से बचाव दल, चिकित्सा दल और तंबू, कंबल और भोजन सहित राहत सामग्री लेकर दो हेलीकॉप्टर और कई जहाज यहां पहुंचे। सुहरयांतो ने बताया कि खुले में रहने वाले करीब 1300 लोग शरणार्थी हो गए हैं, जो अस्थायी आश्रयों में पाना ली है।

अस्वीकरण:प्रभासाक्षी ने इस खबर को निराशा नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआइ-भाषा की भाषा से प्रकाशित की गई है।



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Saurabh Namdev

| PR Creative & Writer | Ex. Technical Consultant Govt of CG | Influencer | Web developer
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